20 फ़रवरी, 2014

हाइकू (सुख के पल )



सुख के पल
ठहर गए होते
दुःख ना होता  |


बात गुड़ सी
है छोटी सी बानगी 
जादूगरी की |
तरसी दृष्टि
उसे ही देखने को
हुई वृष्टि |
मेकल सुता
संगम को बेताब
शिप्रा जल से |

पतंग  कटी
 डाली से जा उलझी 
उड़ न सकी |


-नई डगर
पहुंचाएगी कहाँ
 किसे खबर |


आहार बनी
एक बूँद रक्त की
मच्छर जी की |
 
शान्ति तलाशी
ना मिल पाई कहीं
हुई शून्य मैं |

राम रहीम
रहते दोनो साथ
नहीं विवाद |
 ओस मानती
जीवन क्षणिक है
कब क्षय हो |
आशा

11 टिप्‍पणियां:

  1. wah / 1st haiku me 1 akshar rah gaya h , 3rd line me
    bura mt maniyega pl

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    1. प्रिय प्रार्थना जी आज में बहुत प्रसन्न हूँ कि आपने मेरी गलती सुधरवाई |टाईप करने में ता लिखना रह गया था |आपको टिप्पणी हेतु धन्यवाद |

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  2. सुंदर सार्थक हाईकू ! बहुत बढ़िया !

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  3. बहुत सुंदर प्रस्तुति.
    इस पोस्ट की चर्चा, शनिवार, दिनांक :- 22/02/2014 को "दुआओं का असर होता है" : चर्चा मंच : चर्चा अंक : 1531 पर.

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  4. हाइकु के साथ ,अर्थ को और विस्तार देते सुन्दर चित्र ! बहुत सुन्दर
    new postकिस्मत कहे या ........
    New post: शिशु

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  5. आँख और मन दोनो करें रसमय - सचित्र हाइकू !

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