09 मार्च, 2014

होली



वही अवीर वही गुलाल
हंसी खुशी और खुमार
बस चेहरे बदल गए हैं
होली के अर्थ बदल गए हैं |
होली तो होली है
रंग में सभी लाल
पर कुछ फर्क हुआ है
रिश्ते बदल गए हैं |
हर वर्ष बड़े उत्साह से
दहन होलिका का करते
खेली जाती होली
ओ मेरे हमजोली |
गले मिलते फाग गाते
चंग की थाप पर
ठुमके लगाते मीठा खाते 
बैर भाव  भूल जाते |
ना बड़ा ना छोटा कोई
समभाव मन में रहता
तन मन रंगता जाता
मन का  कलुष  फिर भी 
दूर न हो पाता |
आशा

20 टिप्‍पणियां:

  1. ***आपने लिखा***मैंने पढ़ा***इसे सभी पढ़ें***इस लिये आप की ये रचना दिनांक10/03/2014 यानी आने वाले इस सौमवार को को नयी पुरानी हलचल पर कुछ पंखतियों के साथ लिंक की जा रही है...आप भी आना औरों को भी बतलाना हलचल में सभी का स्वागत है।


    एक मंच[mailing list] के बारे में---


    एक मंच हिंदी भाषी तथा हिंदी से प्यार करने वाले सभी लोगों की ज़रूरतों पूरा करने के लिये हिंदी भाषा , साहित्य, चर्चा तथा काव्य आदी को समर्पित एक संयुक्त मंच है
    इस मंच का आरंभ निश्चित रूप से व्यवस्थित और ईमानदारी पूर्वक किया गया है
    उद्देश्य:
    सभी हिंदी प्रेमियों को एकमंच पर लाना।
    वेब जगत में हिंदी भाषा, हिंदी साहित्य को सशक्त करना
    भारत व विश्व में हिंदी से सम्बन्धी गतिविधियों पर नज़र रखना और पाठकों को उनसे अवगत करते रहना.
    हिंदी व देवनागरी के क्षेत्र में होने वाली खोज, अनुसन्धान इत्यादि के बारे मेंहिंदी प्रेमियों को अवगत करना.
    हिंदी साहितिक सामग्री का आदान प्रदान करना।
    अतः हम कह सकते हैं कि एकमंच बनाने का मुख्य उदेश्य हिंदी के साहित्यकारों व हिंदी से प्रेम करने वालों को एक ऐसा मंच प्रदान करना है जहां उनकी लगभग सभी आवश्यक्ताएं पूरी हो सकें।
    एकमंच हम सब हिंदी प्रेमियों का साझा मंच है। आप को केवल इस समुह कीअपनी किसी भी ईमेल द्वारा सदस्यता लेनी है। उसके बाद सभी सदस्यों के संदेश या रचनाएं आप के ईमेल इनबौक्स में प्राप्त करेंगे। आप इस मंच पर अपनी भाषा में विचारों का आदान-प्रदान कर सकेंगे।
    कोई भी सदस्य इस समूह को सबस्कराइब कर सकता है। सबस्कराइब के लिये
    http://groups.google.com/group/ekmanch
    यहां पर जाएं। या
    ekmanch+subscribe@googlegroups.com
    पर मेल भेजें।
    [अगर आप ने अभी तक मंच की सदस्यता नहीं ली है, मेरा आप से निवेदन है कि आप मंच का सदस्य बनकर मंच को अपना स्नेह दें।]

    जवाब देंहटाएं
  2. इंसान की फ़ितरत बदलती जा रही है -किसी भी त्यौहार का रूप अब पहलेवाला कहाँ रहा है !

    जवाब देंहटाएं
  3. उत्तर
    1. टिप्पणी लेखन को बल देती हैं |धन्यवाद सर |

      हटाएं
  4. बहुत सुन्दर रचना ! आपने होली का मूड बना दिया ! रंगों के इस पर्व पर हार्दिक शुभकामनायें !

    जवाब देंहटाएं
  5. बहुत सुन्दर प्रस्तुति।
    --
    आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा आज सोमवार (10-03-2014) को आज की अभिव्यक्ति; चर्चा मंच 1547 पर भी है!
    --
    सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
    --
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

    जवाब देंहटाएं
  6. बहुत सुंदर और समसामयिक रचना ....रंगोत्सव की अगवानी करती सी ......सच ही
    पहले सा अपनापन न जाने कहाँ खोगया .....

    जवाब देंहटाएं
    उत्तर
    1. आपने बहुत सही कहा है अब त्यौहार त्यौहार नहीं लगते |

      हटाएं
  7. सामयिक ... सब कुछ बदल रहा है ... पर ये बदलाव हम से है ... त्योहारों में तो कुछ कमी नहीं ...

    जवाब देंहटाएं

Your reply here: