28 मई, 2014

रे मन मेरे (हाईकू )





रे मन मेरे
क्यूं उलझा रहता
चैन गवाता |

तारीफ तेरी
किस बात के लिए
जख्म दे गयी |

बाण नैनों के
नागिन जैसी जुल्फें
दीवाना करें |

दो  पटरियां 
चांदनी रात कहे 
दूर जाना है |

दो पटरियां 
मिल न पातीं कभी 
साथ चलतीं |


जाना चाहती
दूर क्षितिज तक
भावों को लिए |

पक्षी चहका
छु कर क्षितिज को
क्षमता जागी |


हाथ बढ़ाया
मिलन की आस में
क्षितिज तक |
आशा






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