08 मई, 2018

अभिसारिका


    









 पलक पसारे बैठी है
 वह तेरे इन्तजार में
हर आहट पर उसे लगता है
कोई और नहीं है  तेरे सिवाय  
हलकी सी दस्तक भी
दिल के  दरवाजे पर जब होती 
 वह बड़ी आशा से देखती है
 तू ही आया है 
मन में विश्वास जगा है
चुना एक फूल गुलाब का
 प्रेम के इजहार के लिए
      काँटों से भय नहीं होता
स्वप्न में  गुलाब देख
 अजब सा सुरूर आया है  
वादे  वफा का नशा
 इस हद तक चढ़ा है कि
उसे पाने कि कोशिश  तमाम हुई है
चर्चे गली गली में सरेआम हो गए
पर उसे इससे कोई आपत्ती नहीं
मन को दिलासा देती है
तेरी महक से पहचान लेती है |
आशा

कोई टिप्पणी नहीं:

टिप्पणी पोस्ट करें

Your reply here: