01 जुलाई, 2018

मुझे हार्दिक प्रसन्नता हो रही है मेरी पुस्तक का नवा संग्रह यायावर आप लोगो के सम्मुख प्रस्तुत करते हुए

भूमिका ‘यायावर’
मेरी दीदी आशा सक्सेना जी के नये काव्य संकलन ‘यायावर’ को लेकर मैं आज आपके सम्मुख उपस्थित हुई हूँ ! दीदी की सृजनशीलता के सन्दर्भ में कुछ भी कहना सूरज को दीपक दिखाने के समान है ! २००९ से वे अपने ब्लॉग ‘आकांक्षा’ पर सक्रिय हैं और उनकी श्रेष्ठ रचनाओं का रसास्वादन आप सभी सुधि पाठक इस ब्लॉग पर इतने वर्षों से कर ही रहे हैं ! दीदी के अन्दर समाहित संवेदनशील कवियत्री अपने आस पास बिखरी हुई हर छोटी से छोटी बात से प्रभावित होती है और हर वह बात उनकी रचना की विषयवस्तु बन जाती है जो उनके अंतर्मन को कहीं गहराई तक छू जाती है ! उनकी रचनाओं में जीवन के विविध रंगों का भरपूर समायोजन हुआ है !
 आज अवसर मिला है मुझे कि मैं आपके समक्ष उनकी कुछ ऐसी रचनाओं की चर्चा करूँ जो न केवल अनुपम अद्वितीय हैं वरन हर मायने में हमारी सोच को प्रभावित करती हैं, प्रेरित करती हैं, हमारे सौन्दर्य बोध को जागृत करती हैं और कई सुन्दर सार्थक सन्देश हमारे मन मस्तिष्क में उकेर जाती हैं ! ये सारी रचनायें उनके इस नवीन काव्य संग्रह ‘यायावर’ में संकलित है !
आशा दीदी के ब्लॉग की रचनाएं किसी सुन्दर उपवन का अहसास कराती हैं जिनसे जीवन के विविध रंगों की भीनी भीनी खुशबू आती है ! उनकी हर रचना हमारे सम्मुख सजीव चित्र सा प्रस्तुत कर देती है !  ‘नाराज़गी’, ‘पूनम का चाँद’, ‘सोनचिरैया’, ‘बिल्ली’ पढ़िए तो ज़रा, आपकी आँखों के सामने एक रूठी हुई बच्ची, एक मुग्धा नायिका और ठुमक ठुमक आँगन में टहलती दाने चुगती चिड़िया और एक नटखट बिल्ली की तस्वीर स्वयमेव खिंच जायेगी ! सामयिक समस्याओं पर भी उनकी लेखनी खूब चली है ! ‘आज का रावण’, ‘फलसफा प्रजातंत्र का’, ‘असमंजस’, ‘बिखराव’ समाज में व्याप्त विसंगतियों और उससे उपजी हताशा पर ही आधारित गंभीर रचनाएं हैं ! उनकी दृष्टि से ‘रेल हादसा’ भी नहीं चूकता है तो ‘हरियाली तीज’ का हर्षोल्लास भरा उत्सवी वातावरण भी उन्हें उत्फुल्ल कर जाता है ! ‘हम किसीसे कम नहीं’ में उन्होंने दिव्यांगों की कर्मठता और आत्मविश्वास को रेखांकित किया है तो ‘आदत वृद्धावस्था की’ में वृद्ध जनों को सकारात्मक सोच रख कर जीवन को भरपूर ढंग से जीने और हर हाल में खुश रहने का सार्थक सन्देश भी दिया है !
आशा दीदी की रचनाएं अन्धकार में जलती मशाल की तरह हैं और सच मानिए तो ये उनके विलक्षण व्यक्तित्व की परिचायक भी हैं ! स्वास्थ्य संबंधी अनेकों समस्याओं से निरंतर जूझते हुए भी उनके लेखन की गति तनिक भी धीमी नहीं हुई ! उनकी जिजीविषा और रचनात्मकता को हमारा कोटिश: नमन ! वे इसी प्रकार अनवरत लिखती रहें और हम सबकी काव्य पिपासा को इसी प्रकार संतुष्ट करती रहें यही मंगलकामना है ! इसके पूर्व उनके आठ कविता संग्रह प्रकाशित हो चुके हैं ! उनका यह नवीन काव्यसंग्रह ‘यायावर’ भी उत्कृष्ट रचनाओं का संकलन है और मुझे पूरा विश्वास है कि यह आप सभी की अपेक्षाओं पर पूरी तरह से खरा उतरेगा ! अनंत अशेष शुभकामनाओं के साथ आशा दीदी को इस नए कीर्तिमान को स्थापित करने के लिए मेरी हार्दिक बधाई ! उनके अगले संकलन की उत्सुकता के साथ प्रतीक्षा रहेगी ! सादर !
साधना वैद   

आपकी प्रतिक्रिया की प्रतीक्षा रहेगी !

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