24 जून, 2018

हर अदा कमसिन














हो तुम बेहद  हसीन 
तुम्हारी हर अदा कमसिन 
मुस्कराहट ने चमक दुगनी
की है चहरे कि
काकुल से घिरी पेशानी
मानो लटें प्यार से मुख चूमती
रौनक ऎसी आई है 

लगती है शाम के साए में लिपटी 
  खूबसूरत एक गजल सी |
हो तुम बहुत हसीन 
तुम्हारी हर अदा कमसिन 
मुस्कराहट ने चमक दुगनी
की है चहरे कि
काकुल से घिरी पेशानी
मानो लटें प्यार से मुख चूमती
रौनक ऎसी आई है
लगाती हो शाम के साए में लिपटी
खूबसूरत एक गजल सी |
आशा

आशा

             

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