22 जुलाई, 2018

आया सावन


चलो चले जाएँगे हम 
लौट कर सावन की  तरह
अगले बरस आने को 
पर इस बरस को भूल न पाएंगे 
रह रह कर याद आएगी 
भाभी बिना त्यौहार मनाने की
कभी इन्तजार रहता था 
सावन के आने का 
हलकी हलकी बारिश में 
भीग कर जाने  का  
बहुत मजा आता था 
अम्मा की डाट खाने में 
उससे भी अधिक 
आनंद की प्राप्ति में 
बस यह केवल रह
  अब गुम होकर 
पुरानी यादों में रह गया है |
आशा

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