16 मार्च, 2019

होना न मगरूर








होना न मगरूर
जब भी कोई बड़ी
 उपलब्धि पाओ
हो एक आम आदमी
 जमीन से जुड़े हुए
यह न जाना भूल
यदि पंख फैलाए
 उड़ने के लिए
गिर जाओगे जमीन पर
चाटते रह जाओगे धूल
अपना अस्तित्व खो बैठोगे
दिल में चुभेंगे शूल
जो देंगे पीड़ा असीम
सह्न न कर  पाओगे उसे
रोम रोम होगा दुखी
उस दर्द  को  न सह पाओगे
एक गलत कदम
 होता कितना कष्टकर
 न जाना उधर भूल
अस्तित्व से सुलह  न की यदि  
टूट जाओगे बिखर कर
गरूर चूर चूर होगा
यदि सोच कर भ्रमित हुए
                                       और हुए मगरूर |

7 टिप्‍पणियां:

  1. आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल रविवार (17-03-2019) को "पन्द्रह लाख कब आ रहे हैं" (चर्चा अंक-3277) पर भी होगी।
    --
    चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
    जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
    --
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

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  2. सार्थक सन्देश देती सुन्दर प्रस्तुति ! बढ़िया !

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  3. सुप्रभात
    धन्यवाद टिप्पणी के लिए |

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  4. सुप्रभात
    टिप्पणी हेतु धन्यवाद ओंकार जी |

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