05 नवंबर, 2019

है मौन का अर्थ क्या ?



तुम मौन हो
निगाहें झुकी हैं
थरथराते अधर
कुछ कहना चाहते हैं |
प्रयत्न इतना किस लिए
मैं गैर तो नहीं
सुख दुःख का साथी हूँ
हम सफर हूँ |
दो मीठे बोल यदि ना बोले
सीपी से सम्पुट ना खोले
तब तो ये अमूल्य पल
यूं ही बीत जाएंगे |
मैं समझ नहीं पाता
मौन की भाषा
कुछ सोच रहा हूँ
चूडियों की खनक सुन |
है शायद यह अंदाज
प्यार जताने का
फिर भी दुविधा में हूँ
है मौन का अर्थ क्या |
आशा

12 टिप्‍पणियां:

  1. आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा आज बुधवार (06-11-2019) को     ""हुआ बेसुरा आज तराना"  (चर्चा अंक- 3511)     पर भी होगी। 
    --
    सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है। 
     --
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'  

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  2. सुप्रभात
    सूचना हेतु आभार सर |

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  3. बहुत सुन्दर रचना ! मौन का अर्थ जो समझ ले समझो उसने दुनिया जीत ली !

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  4. धन्यबाद साधना टिप्पणी के लिए |

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  5. अगर इस ब्लॉग की रचनाएं पसंद आती हैं तो मेरा ब्लॉग कीजिए |ब्लॉग पर आने के लिए धन्यवाद |

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  6. जी नमस्ते,
    आपकी लिखी रचना हमारे सोमवारीय विशेषांक
    ११ नवंबर २०१९ के लिए साझा की गयी है
    पांच लिंकों का आनंद पर...
    आप भी सादर आमंत्रित हैं...धन्यवाद।,

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  7. धन्यवाद अनुराधा जी टिप्पणी के लिए |

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  8. बहुत ही सुंदर सटीक एवं सार्थक रचना।

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  9. बहुत ही सुंदर सृजन आशा दी ,सादर नमन

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