04 जनवरी, 2020

अनोखे शिल्पी


हो तुम अनोखे शिल्पी
एक से एक मूर्तियाँ बनाते
प्राण प्रतिष्ठा उनमें करते
लगता है ऐसा जैसे हो  जीवंत
अभी हलचल में आएंगी
मन में उनके है क्या
मुखरित हो बयान करेंगी  
यूँ तो नयन और
 लव रहते मौन सदा  
हरपल ऐसा लगता है
सीपी सम्पुट खोलेगी
शब्दों का स्त्राव करेगी
भावनाओं में बह कर
अभी  बोल पड़ेगी
चंचल चितवन से मन को
मोहे लेगी ऐसा जैसे  
जन्नत की सैर करा देगी
हर रंग जो तुमने चुना है
सदाबहार लगता है
उससे  सजाए परिधान
बड़े सुहाने लगते हैं
दिल चाहता है बस
 एकटक निहारते ही रहें
मन में बसा लें उन्हें |
आशा

8 टिप्‍पणियां:

  1. आपकी लिखी रचना ब्लॉग "पांच लिंकों का आनन्द" में रविवार 05 जनवरी 2020 को साझा की गयी है......... पाँच लिंकों का आनन्द पर आप भी आइएगा....धन्यवाद!

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    1. सुप्रभात
      सूचना के लिए धन्यवाद यशोदा जी |

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  2. उत्तर
    1. सुप्रभात
      टिप्पणी के लिए धन्यवाद ओंकार जी |

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  3. क्या बात है ! बड़ी ही जीवंत एवं सुन्दर रचना ! बहुत खूब !

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  4. धन्यवाद ज्योति जी टिप्पणी के लिए |

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