27 जून, 2020

वर्षा की दस्तक




जब काली घटाएं  छाईं आसमान में
बादल गरजे बिजली कड़की 
बारिश की बूंदों ने की  अमृत की वर्षा 
बदले मौसम  में धरा ने ली अंगड़ाई  |
चहु ओर छाई हरियाली खेतों में
हुआ मन विभोर इस  अनुपम छटा को  देख 
इसी मनोरम दृश्य को देख 
आत्मसात करने की इच्छा हुई बलवती |
गर्म मौसम की तल्खी  हुई कम
ठण्डी बयार बह चली जिस ओर 
नन्हीं नन्हीं बूंदों ने किया सराबोर
घर आँगन खेतों को हो कर विभोर |
 तरसी निगाहें इसे आत्मसात करने को 
प्रकृति की अनमोल छवि मन में उतारने को 
मनोभाव मन में दबा न सकी 
कागज़ पर कलम भी खूब चली |
आशा



                             

11 टिप्‍पणियां:


  1. जय मां हाटेशवरी.......

    आप को बताते हुए हर्ष हो रहा है......
    आप की इस रचना का लिंक भी......
    28/06/2020 रविवार को......
    पांच लिंकों का आनंद ब्लौग पर.....
    शामिल किया गया है.....
    आप भी इस हलचल में. .....
    सादर आमंत्रित है......

    अधिक जानकारी के लिये ब्लौग का लिंक:
    https://www.halchalwith5links.blogspot.com
    धन्यवाद

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    1. आभार सहित धन्यवाद कुलदीप जी सूचना के लिए |

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  2. उत्तर
    1. धन्यवाद शास्त्री जी टिप्पणी के लिए |

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  3. वाह ! बहुत सुन्दर चली कलम ! मौसम भी सुहाना हुआ और मन भी प्रफुल्लित हुआ !

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  4. सुन्दर अभिव्यक्ति।

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    1. इस टिप्पणी को लेखक द्वारा हटा दिया गया है.

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    2. धन्यवाद टिप्पणी के लिए |

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