18 जुलाई, 2020

क्या बड़ी भूल कर बैठी है






छूने लगी है  हर   सांस
 तुम्हारी धड़कनों को
जीने का है मकसद क्या ?
 यह तक न सोच पाई |
 की इतनी जल्द्बाजी
 निर्णय लेने  में
स्वप्नों में वह कल्पना भी
 बुरी नहीं लगती थी |
उससे उबर भी न पाई थी
कि सच्चाई सामने आई
पर  वास्तविकता से
 सामना इतना  सरल नहीं है
 उस पर  यदि विचार करो  |
सच्चाई छुप नहीं पाती
जब झूट का सहारा लेती
तभी  तो सिर उठाती है
उबाऊ जीवन के बोझ के  
आगे आगे चलती है |
किसी और के  मुखोटे को
अपने मुह पर  लगा कर 
उसे ही अपना मान कर
 क्या बड़ी भूल कर बैठी है ?
आशा


16 टिप्‍पणियां:

  1. आपकी लिखी रचना ब्लॉग "पांच लिंकों का आनन्द" रविवार 19 जुलाई 2020 को साझा की गयी है......... पाँच लिंकों का आनन्द पर आप भी आइएगा....धन्यवाद!

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    1. सुप्रभात
      सूचना हेतु आभार दिग्विजय जी |

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  2. उत्तर
    1. आभार सहित धन्यवाद टिप्पणी के लिए शास्त्री जी |

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  3. उत्तर
    1. सुप्रभात
      टिप्पणी के लिए आभार सहित धन्यवाद ओंकार जी |

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  4. नमस्ते,
    आपकी इस प्रविष्टि के लिंक की चर्चा सोमवार (20-07-2020) को 'नजर रखा करो लिखे पर' ( चर्चा अंक 3768) पर भी होगी।
    --
    चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्त्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
    जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाए।
    --
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    --
    -रवीन्द्र सिंह यादव

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    1. सुप्रभात
      सूचना हेतु आभार रवीन्द्र जी |

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  5. बहुत ही सुंदर अभिव्यक्ति

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    1. सुप्रभात
      धन्यवाद टिप्पणी के लिए हिंदी गुरु जी |
      |

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  6. सार्थक सृजन ! अच्छी अभिव्यक्ति !

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  7. धन्यवाद साधना टिप्पणी के लिए |

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  8. भावपूर्ण सुंदर कविता।

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  9. बहुत सुंदर रचना आदरणीया

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