21 अगस्त, 2020

पारिजात के पुष्प






हो तुम  खुशबू का खजाना
    दिया जो उपहार में
इस प्रकृति नटी ने तुम्हें
 सवारने सहेजने के लिए |
दी अपूर्व सुन्दरता हर एक पंखुड़ी में  
श्वेत रंग दिया भरपूर
नारंगी रंग की  डंडी ने 
अद्भुद निखार लाया है|
जब धरती पर
 पुष्प  झर झर झरे
 मंद मंद हवा बहे  
एक अनूठी सैज सजे  
पारिजात वृक्ष के तले |
जागा अदभुद एहसास
उस पर कदम पड़ते ही
 मन को सुकून आया है
देखी तुम्हारी बिछी श्वेत चादर
कितने जतन किये थे मैंने
तुम्हारे रूप को सजाने में |
हो तुम श्वेत सुन्दर अनुपम कृति
ईश्वर प्रदत्त उपहार में हमें
रोज चढ़ाए जाते 
पुष्प प्रभु के चरणों में
 महकता मंदिर का आँगन
 अनुपम सुगंध से है जो  है  प्रिय
 हमें और हमारे आराध्य को
आशा  

12 टिप्‍पणियां:

  1. धन्यवाद स्मिता टिप्पणी के लिए |

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  2. आपकी लिखी रचना "सांध्य दैनिक मुखरित मौन में" आज शुक्रवार 21 अगस्त 2020 को साझा की गई है.... "सांध्य दैनिक मुखरित मौन में" पर आप भी आइएगा....धन्यवाद!

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  3. सौरभ और सौन्दर्य का अद्भुत योग होता है हरसिंगार के इन फूलों में ! अत्यंत नयनाभिराम ये सुकोमल पुष्प वास्तव में प्रकृति का अनुपम उपहार होते हैं !

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  4. सुप्रभात
    धन्यवाद टिप्पणी के लिए प्रतिभा जी |

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  5. आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा कल रविवार (23-08-2020) को    "आदिदेव के नाम से, करना सब शुभ-कार्य"   (चर्चा अंक-3802)    पर भी होगी। 
    --
    श्री गणेश चतुर्थी की
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।  
    सादर...! 
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'  
    --

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