09 सितंबर, 2020

कभी सोचा न था


जिन्दगी इस हद तक
घिसटती जाएगी
फिर से गाड़ी पटरी पर
लौट न पाएगी |
हुआ है जीवन एक ऐसा  बोझा
जिसे सर पर भी उठा नहीं पाते
किसी मशीन का ही
सहारा लेना पड़ता है
 जब उससे बच निकलना चाहते |
फिर भी  सर पर से
 बोझ कम नहीं होता
क्या करें किसका सहारा लें
या खुद ही इतनी क्षमता उत्पन्न करें
पर भय बना रहता है
 कहीं देर न हो जाए
हम जहां थे वहीं खो न जाएं |

9 टिप्‍पणियां:

  1. आत्मविश्वास सभी समस्या का समाधान है

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  2. जिंदगी जीने का नाम है, जीना है तो इसकी समस्यायों का सामना हिम्मत से करना है |

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  3. आपकी इस प्रस्तुति का लिंक 10.9.2020 को चर्चा मंच पर दिया जाएगा। आपकी उपस्थिति मंच की शोभा बढ़ाएगी|
    धन्यवाद
    दिलबागसिंह विर्क

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  4. यही सही रहेगा ! खुद में ही इतनी क्षमता उत्पन्न करनी होगी कि किसी दूसरे का सहारा लेने की नौबत ही न आये ! सुन्दर रचना !

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  5. सुप्रभात
    धन्यवाद टिप्पणी के लिए |

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