29 अक्तूबर, 2020

बेचैनी

 


 कोई जब बेचैन हो

कहाँ जाए किससे सलाह लें

यह सिलसिला कब तक चले

यह तक जान न पाए |

मन को वश में कितना रखे

कब तक रखे कैसे रखे

इसकी शिक्षा किससे ले

 यह भी सोच  न पाए |

 एक ही बात दिमाग में रहे

किसी की बात जब तक मानों

सहन शक्ति से ऊपर ना हो

वह अपने हित में हो |

जब किसी पर  क्रोध आए

है दूरी जरूरी  उससे

 मन को जहां  जब चिंता हो

वहां  जाना नहीं जरूरी |

मन की खुशी के लिए

हर वह कार्य किया जाए

जिससे किसी को दुःख न पहुंचे

खुद को भी प्रसन्नता छू पाए |

सारे टोने टोटके हुए बेअसर

मन को समझाने को

अब कोई क्या करे

कहाँ जाए किससे मदद मांगे |

आशा

 

 

 

20 टिप्‍पणियां:

  1. सादर नमस्कार,
    आपकी प्रविष्टि् की चर्चा शुक्रवार ( 30-10-2020) को "कितना और मुझे चलना है ?" (चर्चा अंक- 3870 ) पर होगी। आप भी सादर आमंत्रित है.

    "मीना भारद्वाज"

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  2. आपकी लिखी रचना "सांध्य दैनिक मुखरित मौन में" आज गुरुवार 29 अक्टूबर 2020 को साझा की गई है.... "सांध्य दैनिक मखरित मौन में" पर आप भी आइएगा....धन्यवाद!

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  3. वाह ! बढ़िया रचना ! किसीसे सलाह मांगने के स्थान पर अपनी सोच के अनुसार चलना चाहिए और अपनी सोच को सदैव सकारात्मक रखना चाहिए ! सुन्दर सृजन !

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  4. मुझे बहुत अच्छी लगी आप की यह रचना दिल को छू गई ।

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  5. ऐसी स्थिति के लिए बुद्ध का कथन है- अप्प दीपो भव.

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  6. आपने तो मन को सँभालने के लिए सुंदर और उपयोगी सीख इसी रचना में दे दी है, अब और कहीं नहीं जाना पड़ेगा।
    किसी की बात जब तक मानों

    सहन शक्ति से ऊपर ना हो

    वह अपने हित में हो |

    जब किसी पर क्रोध आए

    है दूरी जरूरी उससे

    मन को जहां जब चिंता हो

    वहां जाना नहीं जरूरी |

    जवाब देंहटाएं

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