07 अक्तूबर, 2020

मस्तिष्क



                                      हर हाल में मस्तिष्क सक्रीय रहता है

सुख़ से  हो या दुखी कभी निष्क्रीय नहीं होता

कोई बात उसे चिंतित नहीं करती

हर समय व्यस्त रहता है अपने कार्य में |

जब निष्क्रीय होने लगता है

कहा जाता है वह  मृत हो गया है

अब कभी चेतना नहीं जागेगी

जीवन भर ऐसे ही जीना होगा |

पर यदि चमत्कार हो जाए

वह फिर  सचेत हो कर कुछ कार्य करे

ईश्वर की मेहरवानी हुई है उस पर

यही तो कहा जाता है |

 यह सब भूल जाते हैं  है तो वह एक मशीन ही 

कब तक सक्रीय रहेगी कभी तो साथ छोड़ेगी 

पर सच्चाई से दूर न हो कर स्वीकारना ही होगा

 है यथार्थ यही जिससे मुख मोड़ रहे हैं |

17 टिप्‍पणियां:

  1. आपकी लिखी रचना "सांध्य दैनिक मुखरित मौन में" आज बुधवार 07 अक्टूबर 2020 को साझा की गई है.... "सांध्य दैनिक मुखरित मौन में" पर आप भी आइएगा....धन्यवाद!

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  2. आपकी इस प्रस्तुति का लिंक 08.10.2020 को चर्चा मंच पर दिया जाएगा। आपकी उपस्थिति मंच की शोभा बढ़ाएगी|
    धन्यवाद
    दिलबागसिंह विर्क

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    1. सुप्रभात
      मेरी रचना की सूचना के लिए आभार सर |

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  3. जब तक मस्तिष्क जीवित होता है तब ही तक मनुष्य भी जीवित होता है ! सुन्दर सार्थक रचना !

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  4. आपकी लिखी रचना ब्लॉग "पांच लिंकों का आनन्द" पर गुरुवार 8 अक्टूबर 2020 को साझा की गयी है.... पाँच लिंकों का आनन्द पर आप भी आइएगा....धन्यवाद!

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  5. सुप्रभात
    लिंक की सूचना देने के लिए आभार सर |

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  6. इसी सच को भूलना ही तो माया है । सत्य कहा । आभार ।

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    1. सुप्रभात
      टिप्पणी के लिए धन्यवाद अमृता जी |

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  7. उत्तर
    1. सुप्रभात
      धन्यवाद टिप्पणी के लिए ओंकार जी |

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