06 अक्तूबर, 2020

कोयल की मीठी सी बोली

वाणी का माधुर्य

कानों में मधुर  रस घोले

है वही भाग्यशाली जो

उसका अनुभव  करे |

जितनी मिठास बोली में होगी

कभी अनुभव तो की होगी

उससे बंचित रहे यदि

बड़ी अनहोनी झेली  होगी |

मीठी मिश्री सी बोली

भाग्य की नियामत है

प्रभु की दी सौगात है

सब के नसीब में कहाँ |

आशा 

 

6 टिप्‍पणियां:

  1. आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा कल बुधवार (07-10-2020) को   "जीवन है बस पाना-खोना "    (चर्चा अंक - 3847)    पर भी होगी। 
    -- 
    सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है। 
    -- 
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।  
    सादर...! 
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक' 
    --

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    उत्तर
    1. सुप्रभात
      मेरी रचना की सूचना के लिए आभार सर |

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  2. सच में ! वाणी का माधुर्य प्रभु की देन ही है !

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  3. धन्यवाद साधना टिप्पणी के लिए |

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  4. धन्यवाद स्मिता टिप्पणी के लिए |

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