18 नवंबर, 2020

स्मृतियाँ

कई खट्टी मीठी यादें

दिल पर दस्तक देतीं

जब अधिकता उनकी होती

कुछ भुला दी जातीं

बहुत सी  याद रह जातीं|

स्मृति पटल पर उकेरी जातीं

जीवन की सच्चाई

 छिपी होती उन में

 लोग दिखावे की  जिन्दगी जीते

घर बाहर दोहरा मापदंड रखते

बाहर हंसते खिलखिलाते

घर में सदा रोते रहते

 या झल्लाते नाराज बने रहते |

स्मृतियाँ उन्हें उलझाए रखतीं

बार बार दस्तक देतीं

 दिमाग के दरवाजे पर

 कहीं वह भूल न जाए उन्हें |

वैसे तो एक शगल सा हो गया है

 बीती बातों को बारम्बार याद करना

उन्हें विस्मृत न होने देना  स्मृतिपटल से  

दिमाग को व्यस्त रखने के लिए

यह तरीका भी काफी है

स्मृतियों में जीने में खोए रहने में

जो सुख मिलता है और कहाँ |

आशा

 

18 टिप्‍पणियां:

  1. स्मृतियों में जीने में खोए रहने में

    जो सुख मिलता है और कहाँ |
    वाह!

    सत्य वचन

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  2. आपकी लिखी रचना "सांध्य दैनिक मुखरित मौन में" आज बुधवार 18
    नवंबर 2020 को साझा की गई है.... "सांध्य दैनिक मखरित मौन में" पर आप भी आइएगा....धन्यवाद!

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    1. मेरी रचना की सूचना के लिए धन्यवाद दिव्या जी |

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  3. आपकी लिखी रचना ब्लॉग "पांच लिंकों का आनन्द" पर गुरुवार 19 नवंबर 2020 को साझा की गयी है.... पाँच लिंकों का आनन्द पर आप भी आइएगा....धन्यवाद!

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  4. सादर नमस्कार,
    आपकी प्रविष्टि् की चर्चा शुक्रवार ( 20-11-2020) को "चलना हमारा काम है" (चर्चा अंक- 3891 ) पर होगी। आप भी सादर आमंत्रित है।

    "मीना भारद्वाज"

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  5. स्मृतियाँ जीवन की कडवाहट को धो पोंछ कर भुला देने में बड़ी सहायक होती हैं ! सुन्दर रचना !

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  6. स्मृतियों पर बहुत सुंदर भावपूर्ण रचना...

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