02 नवंबर, 2020

घट भरा विचारों से


                                   

कहने को कोई बात नहीं है

पर है भण्डार विचारों का

जिन्हें एक घट में किया संचित

कब गगरी छलक जाए

यह भी कहा नहीं जा सकता

पर कभी बेचैन मन इतना हो जाता है

कह भी नहीं पाता ठोकर लगते ही

छलकने लगता गिरने को होता

ऐसी नाजुक  स्थिति में बहुत शर्म आती है

कहानी अनकही जब उजागर हो जाती है |

पर कब तक बातें मुंह तक आकर रुक जातीं

मन ही मन बबाल मचाती रहतीं

चलो अच्छा हुआ मन का गुबार निकल गया

फिर से मुस्कान आई है चहरे पर |

किसी ने सच कहा है स्पष्ट बोलो

मन से अनावश्यक बातों को निकाल फेंको

मन दर्पण सा हो साफ

तभी जीवन होगा सहज

 भविष्य भी सुखमय बीतेगा |

आशा

 

 

 

 

 

10 टिप्‍पणियां:

  1. आपकी लिखी रचना "सांध्य दैनिक मुखरित मौन में" आज सोमवार 02 नवंबर 2020 को साझा की गई है.... "सांध्य दैनिक मखरित मौन में" पर आप भी आइएगा....धन्यवाद!

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  2. मन दर्पण सा हो साफ
    तभी जीवन होगा सहज
    बहुत सुंदर और अनमोल विचार आशा जी.
    प्रणाम और शुभकामनाएं🙏🙏

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  3. मन ही मन बबाल मचाती रहतीं

    चलो अच्छा हुआ मन का गुबार निकल गया

    फिर से मुस्कान आई है चहरे पर |

    किसी ने सच कहा है स्पष्ट बोलो

    मन से अनावश्यक बातों को निकाल फेंको

    अनमोल भाव लिए उत्कृष्ट कविता
    सादर

    जवाब देंहटाएं
    उत्तर
    1. धन्यवाद टिप्पणी के लिए |टिप्पणी अच्छी लगी |

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  4. वाह ! बहुत ही सुंदर प्रस्तुति ! बढिया रचना !

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  5. आपकी लिखी रचना ब्लॉग "पांच लिंकों का आनन्द" बुधवार 4 नवंबर 2020 को साझा की गयी है......... पाँच लिंकों का आनन्द पर आप भी आइएगा....धन्यवाद!

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