11 दिसंबर, 2020

मौसम बेईमान हो गया


                                                         मौसम बड़ा बेईमान हो गया  

अपनी मनमानी करने लगा है  

वर्षा का क्या कोई ईमान नहीं

 चाहे अनचाहे दस्तक देती है |

हरी भरी फसल जमीन पर पसरी है

 सारी मह++नत विफल हुई है

सुरमई बादलों को

 जब देखा आसमान में |

गरजते बरसते   नहला जाते हैं 

बेमौसम उत्पात मचा जाते   है

मौसम का मिजाज बदल रहा है

वे सर्दी और बढ़ा जाते हैं |

आशा

 

 

14 टिप्‍पणियां:

  1. जी नमस्ते ,
    आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल शनिवार (१२-१२-२०२०) को 'मौन के अँधेरे कोने' (चर्चा अंक- ३९१३) पर भी होगी।
    आप भी सादर आमंत्रित है
    --
    अनीता सैनी

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    1. सुप्रभात
      मेरी रचना की सूचना के लिए आभार अनीता जी |

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  2. सुप्रभात
    टिप्पणी हेतु आभार सहित धन्यवाद वर्षा जी |

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  3. उत्तर
    1. सुप्रभात
      धन्यवाद प्रतिभा दीदी टिप्पणी के लिए |

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  4. हर मौसम की अपनी अहमियत होती है ! इस मौसम की फसल को भी वर्षा की ज़रुरत तो होती ही है ! अच्छी मौसमी रचना !

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    1. सुप्रभात
      धन्यवाद साधना टिप्पणी के लिए |

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  5. सुप्रभात टिप्पणी के लिए आभार सहित धन्यवाद अविनाश महरोत्रा जी |

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