09 अप्रैल, 2021

राज

 



दिल नहीं चाहता

गैरों से संबाद करू

जब भी ऐसे अवसर आते  

वे दुःख ही देते

कभी सही सलाह नहीं देते |

अपने तो अपने होते

मतलबी नहीं

जो मतलब की बातें करते

उन्हें अपना समझने की भूल

अक्सर हो जाती

 बचने के लिए इससे

अपनी कोई बात

जब वे बाँट नहीं सकते

सोचो हैं कितने गहरे पानी में

उनकी पहचान तभी

हो पाएगी   

तभी असली राज

 खुल पाएगा  |

आशा

 

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8 टिप्‍पणियां:

  1. सुप्रभात
    धन्यवाद ओंकार जी टिप्पणी के लिए |

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  2. धन्यवाद आलोक जी टिप्पणी के लिए |

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  3. सही है ! उथले रिश्ते किसी काम के न होते !

    जवाब देंहटाएं

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