04 मई, 2021

कोई रिक्त स्थान नहीं




 

चहरे से पर्दा हटा

किसी ने कहा था कभी

उसे तुम से प्यार है

तुमने जबाब दिया था

 हंस कर |

आगे जाओ 

यहाँ कोई स्थान  रिक्त  नहीं  |

वह मन मसोस कर रह गया

आँखों में छलके  अश्रु

चालाकी से उसने

उन्हें छिपा लिया |

पर तुमसे नहीं

 छिप् पाए आंसू

इशारों से अपनी

 व्यथा कथा बता गए |

मन ने सोचा

 इतनी सी बात भी

न दिल में रख पाए

फिर खुद को बहुत

चतुर कैसे कहते 

आशा 

7 टिप्‍पणियां:

  1. सुन्दर रचना ! बहुत बढ़िया !

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  2. धन्यवाद साधना टिप्पणी के लिए |

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  3. बहुत ही सुंदर रचना। कैसे कोई किसी के मन की बात समझकर भी ना कह दे और जीवन भर हाथ मले।

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  4. सुप्रभात
    तिप्पस्नी के लिए आभार सहित धन्यवाद पुरुषोत्तम जी |

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