13 जून, 2021

परीक्षा सब्र की


 

ना लीजिये परीक्षा मेरे सब्र की

आपने मुझे अभी परखा नहीं है

जब मेरे बारे में सोचेंगे मुझे समझेंगे

खुद ही जान जाएंगे मैं  क्या हूँ |

यह तो  अपना अपना नजरिया है

मंतव्य स्पष्ट करे न करे

कोई जोर जबरदस्ती नहीं है

खुद का  विचार भी हो अन्यों जेसा |

मुझे सुहाता स्पष्ट दिया गया मत  

किसी के विचारों से प्रेरित  न हो

स्वनिर्णय पर  अटल रहना चाहती

अन्यों से  प्रभावित हो अपने विचार नहीं देती |

अपना व्यक्तित्व मुझे प्रिय है

 स्वतंत्र हैं विचार मेरे किसी से प्रभावित नहीं

जब अन्य कोई ध्यान देता मेरे विचारों पर

 खुश होता मेरे सोच  के दायरों पर |

आशा 


आशा

10 टिप्‍पणियां:

  1. नमस्ते,
    आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा सोमवार (14-06-2021 ) को 'ये कभी सत्य कहने से डरते नहीं' (चर्चा अंक 4095) पर भी होगी। आप भी सादर आमंत्रित है।

    चर्चामंच पर आपकी रचना का लिंक विस्तारिक पाठक वर्ग तक पहुँचाने के उद्देश्य से सम्मिलित किया गया है ताकि साहित्य रसिक पाठकों को अनेक विकल्प मिल सकें तथा साहित्य-सृजन के विभिन्न आयामों से वे सूचित हो सकें।

    यदि हमारे द्वारा किए गए इस प्रयास से आपको कोई आपत्ति है तो कृपया संबंधित प्रस्तुति के अंक में अपनी टिप्पणी के ज़रिये या हमारे ब्लॉग पर प्रदर्शित संपर्क फ़ॉर्म के माध्यम से हमें सूचित कीजिएगा ताकि आपकी रचना का लिंक प्रस्तुति से विलोपित किया जा सके।

    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।

    #रवीन्द्र_सिंह_यादव

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    उत्तर
    1. सुप्र्सभात
      मेरी रचना की सूचना के लिए आभार रवीन्द्र जी |

      हटाएं
  2. बहुत सुन्दर सृजन ! इसे कहते हैं आत्म विश्वास ! बहुत बढ़िया ! प्रेरक रचना !

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  3. सुप्रभात
    धन्यवाद टिप्पणी के लिए साधना |

    जवाब देंहटाएं
  4. सुप्रभात
    धन्यवाद टिप्पणी के लिए ओंकार जी |

    जवाब देंहटाएं
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