31 जुलाई, 2021

रंगीला मौसम


 

 मौसम आज 

है बहुत रंगीन 

गाई कजरी 

दादरे  सावन के  

बूंदे  बरसें

मन में मिश्री घोलें 

बूँदें टपकें

झर झर कर के

मन मोह लें  

 स्वर लहरी  मधुर 

गीत संगीत

मन को लुभाता है 

 लय  प्रधान 

मीठी मन मोहक

सब को लगे  

सृष्टि की बारिश है

इतनी प्यारी

सावन की कजरी 

ऐसी आवाज  

पर ढोलक बजी  

 पैर न थके 

घूमर कर कर 

घुंगरू सजे 

पैर उठने लगे

थिरक रहे

उस संगीत पर

रौनक  हुई  

हुआ नृत्य मयूर   

बादल आए    

उमढ घुमड़ के  

रौनक बढ़ी

समा हुआ रंगीन

गीत गाने में    

सब हुए मगन

 ठुमक रहे    

नृत्य संगीत पर 

 लहरा रही 

सतरंगी चूनर 

ओढी गोरी ने     

मौसम सुहावना      

कोई न रहा

उससे अनछुआ 

सभी घूमते  

सुरम्य वादियों में

 भीगते जाते 

तरबतर होते

ऋतु है बरसाती    

मन मीत आने की  |

आशा

 

14 टिप्‍पणियां:

  1. सुप्रभात
    आभार सहित धन्यवाद आलोक जी टिप्पणी के लिए |

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  2. वाह ! बारिश का बहुत सुन्दर शब्द चित्र ! बढ़िया रचना !

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  3. नमस्ते,
    आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा सोमवार (02-08-2021 ) को भारत की बेटी पी.वी.सिंधु ने बैडमिंटन (महिला वर्ग ) में कांस्य पदक जीतकर इतिहास रचा। (चर्चा अंक 4144) पर भी होगी। आप भी सादर आमंत्रित है। रात्रि 12:01 AM के बाद प्रस्तुति ब्लॉग 'चर्चामंच' पर उपलब्ध होगी।

    चर्चामंच पर आपकी रचना का लिंक विस्तारिक पाठक वर्ग तक पहुँचाने के उद्देश्य से सम्मिलित किया गया है ताकि साहित्य रसिक पाठकों को अनेक विकल्प मिल सकें तथा साहित्य-सृजन के विभिन्न आयामों से वे सूचित हो सकें।

    यदि हमारे द्वारा किए गए इस प्रयास से आपको कोई आपत्ति है तो कृपया संबंधित प्रस्तुति के अंक में अपनी टिप्पणी के ज़रिये या हमारे ब्लॉग पर प्रदर्शित संपर्क फ़ॉर्म के माध्यम से हमें सूचित कीजिएगा ताकि आपकी रचना का लिंक प्रस्तुति से विलोपित किया जा सके।

    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।

    #रवीन्द्र_सिंह_यादव

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    उत्तर
    1. सुप्रभात
      मेरी रचना को शामिल करने के लिए आभार रवीन्द्र जी |

      हटाएं
  4. सुप्रभात
    धन्यवाद अनीता जी टिप्पणी के लिए |

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  5. सुहावने मौसम का सुन्दर वर्णन, सुन्दर कजरी ।

    जवाब देंहटाएं

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