04 अक्तूबर, 2021

खुद्दारी


                                                        खुद्दारी है आवश्यक

यदि समझे न अर्थ इसका

तो क्या जान पाए

अपने को न पहचान सके तो क्या किया |

हर बात पर हाँ की मोहर लगाना

नहीं होता  कदाचित यथोचित

कभी ना की भी आवश्यकता होती है

अपनी बात स्पष्ट करने के लिए |  

दर्पण में अपनी छवि देख 

अपने विचारों में अटल रहना  

स्वनिर्णय लेना है आवश्यक

अपने आचरण में परिवर्तन न हो  

है यही खुद्दारी सरल शब्दों में |

अपनी बात पर अडिग रह  

 सही ढंग से कोई कार्य  करना

अपनी बात भी रह जाए

 और किसी की हानि न हो |

स्वनिर्णय आता खुद्दारी के रूप में

यदि होना पड़े इस से दूर

 तब दूसरों की जी हुजूरी कहलाती

और  खुद्दारी नहीं रहती |

जीवन की सारी घटनाएं इससे सम्बंधित होतीं   

खुद्दारी आत्म विश्वास में वृद्धि करती   

मन को चोटिल होने से बचाती

 सफल जीवन जीने की राह दिखाती |

आशा

11 टिप्‍पणियां:

  1. सादर नमस्कार ,

    आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल मंगलवार(5-10-21) को "एक दीप पूर्वजों के नाम" (चर्चा अंक-4208) पर भी होगी।
    आप भी सादर आमंत्रित है,आपकी उपस्थिति मंच की शोभा बढ़ायेगी।
    ------------
    कामिनी सिन्हा

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    उत्तर
    1. सुप्रभात
      मेरी रचना की सूचना के लिए आभार कामिनी जी |

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  2. आधारभूत बात कही है आपने। बहुत सुन्‍दर।

    जवाब देंहटाएं
    उत्तर
    1. सुप्रभात आदरणीय बैरागी जी टिप्पणी के लिए धन्यवाद |

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  3. सुन्दर सार्थक रचना ! बहुत बढ़िया !

    जवाब देंहटाएं

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