27 जनवरी, 2022

बेटी आई


 

आई खुश खबरी 

 मन हुआ उत्फुल्ल  

जब बेटी आई घर में

 बहार आई जीवन में |

जब घुटनों चली 

चलना सीखा, खुद खड़ी हुई

 अपनी चाह बताने को 

फरमाइश भी खुद ही करने लगी |

एक दिन भेजा उसके पापा को

 बाजार सौदा लाने को

वे ले आए पायलें जो छमछम बोलें  

जब बजें कान में रस घोलें |

वह ठुमक ठुमक कर चलने लगी

घुघरुओं की खनक  

सुनाई देती आँगन में   

 मन मोर सा नाचने लगता उसे देख |

किसी ने कहा

 यह तो है पराया धन

पर मन बोला नहीं है वह पराया धन

वह  तो है  लक्ष्मीं घर की  |  

वही  हैं  बडभागी

जिनके घर बेटी जन्म लेती 

सभी बधाई देते

मिठाई बांटी जाती खुशिया मनाई जातीं |  

जब बेटी पढेगी लिखेगी

सर्वगुण सम्पन्न बनेगी  

उसके गुणों की चर्चा सर्वत्र होगी |

जब व्याही जाएगी 

 एक नहीं दो कुल की मर्यादा निभाएगी  

सर हमारा गर्व से उन्नत होगा 

 यही हमें पुरूस्कार मिलेगा |

आशा 

4 टिप्‍पणियां:

  1. सुप्रभात
    आभार सहित धन्यवाद आलोक जी टिप्पणी के लिए |

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  2. इसमें कोई संदेह नहीं ! बेटियाँ घर की लक्ष्मी होती हैं ! सुन्दर रचना !

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  3. सुप्रभात
    धन्यवाद साधना टिप्पणी के लिए |

    जवाब देंहटाएं

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