19 मार्च, 2022

जीवन की शाम




 

जीवन की शाम कैसे मधुर हो

आज तक किसी ने बताया नहीं 

जितनी कोशिश करने की थी क्षमता 

पूरी कोशिश की मन को स्थिर रखने की |

आज तक मन को संतुलित रखा है

हर बात तुम्हारे आधीन यह भी समझा

कभी तनाव मन में न रखा

 फिर भी न जाने  क्यों मन अब बस में नहीं |

कैसे उसे समझाऊँ नियंत्रित रखूँ

 देना  शक्ति मुझे  मन कमजोर रहूँ  ना 

इस संसार से बाहर निकल 

भव सागर के बंधन तोडूं 

कर्तव्यों से मुंह न मोडूं|

आशा

2 टिप्‍पणियां:

  1. जब सब कुछ इश्वर के ही आधीन है तो अधीरता कैसी ! जिस विधि राखे राम उसी विधि रहिये और उसके फैसलों पर संदेह मत करिए ! क्योंकि वह जो करता है सोच समझ कर करता है ! उत्तम अभिव्यक्ति !

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