17 जुलाई, 2022

नित नए स्वप्न आते



रोज रात स्वप्न
आते 
पर कुछ ही याद रहते 

 वे कई प्रभाव छोड़ते 

मन मस्तिष्क पर |

क्या होने को है क्या घटित होगा ?

उसका निशान छोड़ते 

उनकी दुनिया है निराली

 रोज बदलती |

 मन को मुदित करती कभी भयभीत 

आधी रात में जागने को बाध्य करती |

बहुत समय तक नींद न आती

 निदिया बैरन हो जाती 

 आँखों ही आखों में सारी रात गुजरती

 पलकें न झपकतीं |

 मन सोचता ही रह जाता 

आखिर यह सब है क्या  ?

 विचार मन में आया कैसे |

कुछ अनहोनी तो न होगी 

या कोई समाचार मिलेगा 

या ईश्वत की चेतावनी

उसके माध्यम से |

 सारा सारा दिन

 सोच विचार में निकलता

मन बेचैन बना रहता

 कई दिनों तक |

जब रात आती

   कोई स्वप्न फिर तैयार रहता

रात्री में  आने के लिए 

मन को सजग करने के लिए |

आशा 

3 टिप्‍पणियां:

  1. बहुत बढ़िया रचना

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  2. स्वप्नों का संसार निराला होता है ! ये हमारे अवचेतन को ही दिखाते हैं ! इनमें किसी अर्थ को ढूँढना नादानी है !

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