31 जनवरी, 2023

प्रभु से क्या माँगा



जीने की तमन्ना थी आज

खुले आसमान के नीचे

मन ही मन ख़ुश हूँ

इस अवसर को पाकर |

कभी सोचा न था

मेरी मुराद भी पूरी होगी

मुझे कुछ भी न चाहिए

मैंने जो चाहा मिल गया है|

मैंने थोड़ा सा प्रयत्न भी

किया था मन से  

तुम्हारी सलाह भी मानी

ईश्वर की आराधना की |

यही मुझे फलदाई हुई

जीवन सुखी जीने के लिए

जितनी आवश्यकता थी

 वही जब पूरी हो गई

अधिक की चाह नहीं रही  |

 यही प्रयत्न किया जो सफल रहा

अधिक की लालसा न की

संतुष्ट मन की चमक

चहरे पर आई सौभाग्य से |

मैंने धन्यवाद किया 

प्रभू का पूरे दिल से 

हुई सफल खुश हाल जिन्दगी जीने में

जो चाहा वह पाया भाग्य से  |

आशा  

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