31 जनवरी, 2023

कहने को कुछ भी नहीं है


 

कहने को कुछ भी नहीं है

समझो तो बहुत कुछ है

मन की मन में रहे

यही क्या कम है |

जन्म से किसी के सब

भाग्य में नहीं होते

जब प्रयत्न किये जाते तब

आसानी से सब मिल जाते |

मन में गुंजन होता

किसी मधुर गीत का

उड़ते पक्षियों के साथ

वह उड़ना चाहता |

कोई वर्जना उसे पसंद नहीं है

स्वछन्द रहने की चाह है

जीवन में स्वतंत्र रहकर वह

खुश रहना चाहता है |

हर चाह हो पूरी नसीब में नहीं उसके

मन की करने की आदत ने

उसे बर्वाद किया है

उसे कहीं का नहीं छोड़ा |

वह अपने अन्दर

कुछ परिवर्तन चाहता है

आध्यात्म की ओर है रुझान

उस ओर ही रूचि रखना चाहता |

जाने कब ईश्वर सुनेगा उसकी

वह सबकी सुनता

वह भी लाइन में लगा है

उसकी कब सुनेगा |


आशा सक्सेना

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