05 मार्च, 2023

सोचो समझो

 


सोचो समझो फूँक फूंक कर कदम रखो

कहीं राह ना भटक जाना

यदि भूले से राह भटके खोज ना पाओगे

अपने को बहुत दुखी पाओगे  |

राह है कठिन कंटकों से भरी

कच्ची सड़क ऊबड़ खाबड़ है

चौपायों को चराते  यहाँ  वहां

यदि  उन में फंसे कष्ट पाओगे|

मुझे तो अभ्यास हो गया है

गाँव में रहने का सब से मिल जुल कर 

कुए से पानी भर कर लाने का

हाथों से सब कार्य करने का  |

अब आदत हो गई है यहाँ रहने की 

मन में  बस गया है गाँव में रहना

यहाँ के सारे काम काज में रुची रखना

सब से मिलना जुलना |

खुद को अलग नहीं समझना

यही जीवन है यहाँ का 

ना कभी हम बदले ना भेद भाव किया 

 यहाँ के लोगों से देशी भाषा सीखी |

सीखे रीति रिवाज यहाँ के लोगों से 

लोग यहाँ  के कहते हमें अपना 

यही तो यश पाया है हमने यहाँ 

किसी ने हमें अपना तो कहा |


 आशा सक्सेना 

5 टिप्‍पणियां:

  1. धन्यवाद बेनामी जी टिप्पणी के लिए

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  2. ग्रामीण जीवन की सादगी और सद्भावना का तो कहना ही क्या ! आत्मीयता, अपनत्व और प्रेम भरा जीवन जीना है तो गाँवों की ओर ही रुख करना होगा !

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  3. धन्यवाद साधना टिप्पणी के लिए |

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