बहती नदी में तिनके का सफर जीवन की यात्रा जैसा लगता है, जहाँ इंसान कभी संघर्ष करता है तो कभी खुशियों के पल जीता है। बहरहाल, मेरा यहाँ आने का एक कारण और भी है। हम लोग मुंशी प्रेमचंद जी की आगामी पुण्यतिथी ३१ जुलाई २०२६ के अवसर पर प्रेमचंद महोत्सव के अंतर्गत "५० दिनों में ५० कहानियाँ" बनाने, सुनाने (और जुटाने की भी!) की ओर प्रयासरत है. अगर आपकी रूचि हो तो इस अभियान में आपका सहर्ष स्वागत है.
अधिक जानकारी आपको यहाँ मिल जाएगी - HindiDiscussionForum dot com धन्यवाद!
बहुत सुंदर
जवाब देंहटाएंधन्यवाद ओंकार जी टिप्पा नी के लिए |
जवाब देंहटाएंछोटी सी सुन्दर सशक्त प्रेरक रचना ! बहुत बढ़िया !
जवाब देंहटाएंबहती नदी में तिनके का सफर जीवन की यात्रा जैसा लगता है, जहाँ इंसान कभी संघर्ष करता है तो कभी खुशियों के पल जीता है। बहरहाल, मेरा यहाँ आने का एक कारण और भी है। हम लोग मुंशी प्रेमचंद जी की आगामी पुण्यतिथी ३१ जुलाई २०२६ के अवसर पर प्रेमचंद महोत्सव के अंतर्गत "५० दिनों में ५० कहानियाँ" बनाने, सुनाने (और जुटाने की भी!) की ओर प्रयासरत है. अगर आपकी रूचि हो तो इस अभियान में आपका सहर्ष स्वागत है.
जवाब देंहटाएंअधिक जानकारी आपको यहाँ मिल जाएगी - HindiDiscussionForum dot com
धन्यवाद!