16 अगस्त, 2018

अनजाने जाने पहचाने







 मेरे आसपास जुटी हैं
मेरी परिचितों की बिसात
अलग से कुछ भी नहीं है
मैं ही हूँ खुद की पहिचान
कतरा कतरा जो छू गया मुझे
वह मेरा अपना हो गया
अहम दूर  तक न छू सका
जो भी मुझसे मिला
मुझमें विलीन हो गया
मंथर गति से आती मलय
मिट्टी की सोंधी खुशबू
बारम्बार करती आकृष्ट अपनी ओर
उन गलियों में जिनमें
बिताया  अपना कल मैंने
कदम थम जाते वहां
उम्र के अंतिम पड़ाव पर आते ही
 लौट कर आने लगा बचपन
और बीते कल की यादें |
आशा

14 अगस्त, 2018

स्वाभिमान


स्वाभिमान जरूरी है
सफल जीवन के लिए 
इस के होते कोई 
मात नहीं दे सकता 
जीवन में प्रगति के लिए 
स्वाभिमान देता है ताकत 
दृढ इच्छाशक्ति को
बनाए रखने की 
यही एक नियामत है
जो सबके पास नहीं होती 
रह जाती है क्षणिक याद 
मरने के बाद तक 
ज़िंदा हूँ जब तक 
स्वाभिनान है ज़िंदा तब तक |
आशा

10 अगस्त, 2018

रखते हैं तुम्हें अपने दिल में


रखते हैं तुम्हें
अपने मन में
छिपाकर  मन की
गहराई में
डरते हैं जमाने  से
कहीं धोका न हो जाए
इतना प्यार करते हैं
डर बना रहता है
प्यार को किसी की
 नजर न लग जाए
यदि कोई सूची हो
प्यार करने वालों की
देखोगे तो जानोंगे
सब से ऊपर
|नाम हमारा होगा उसमें |
आशा

09 अगस्त, 2018

शहीद





नमन तुम्हें शहीद
देश के सपूत वीर
क्या नहीं किया तुमने
देश हित के लिए |
हम करते प्रणाम 
सारे शहीदों को
और उन माताओं को  
जिनने जन्मा वीर सपूतों को |
जाने कितने वीरों ने दी आहुति
अपना प्रण पूर्ण किया
देश हित के लिए दी जान 
अपनी निष्ठा की पूर्ण अपनी |
हमें गर्व है उन सपूतों पर
जो जीते देश हित  के लिए  
उस हेतु ही जान देते
अपना सब कुर्बान करते 
देश के लिए |


आशा

08 अगस्त, 2018

शत शत नमन




भारत माता के सच्चे सपूत
देश के रखवाले
तुम्हें शत शत नमन
दिन रात सुरक्षा
सीमा की करते
उत्साह क्षीण न होने देते
तुम्हें मेरा प्रणाम
वह मां है बहुत भाग्यशाली
जिसने जन्म दिया
तुम जैसे वीर सपूत को
उसे शत शत नमन
तुम्हारी वीरता के चर्चे
पूरा देश कर रहा
जाती धर्म वर्ग से हटकर
वीरता के चर्चे कर रहा
तुम्हें शत शत नमन
देश है हमारा
उसके लिए जियेंगे
उसके लिए ही
जान न्योछावर करेंगे
यही जज्बा यही शक्ति
मन में धारण करने वाले
देश के रक्षक
तुम्हें मेरा सलाम |

06 अगस्त, 2018

मुलाकात




यूँ तो बरसों न मिले
अब मिले तो कहने को रहा
मुलाक़ात का समय कम रहा
यह कैसा ख्याल मन में आया
मुलाक़ात न हुई
 जी का जंजाल हो गई 
गले की फांसी हो गई
 जी भर कर आनंद न  लिया
ना अपनी  जिन्दगी जी पाई
हर समय अहसास सालता रहा
क्या कमीं रह गई मेरे व्यवहार में  
हजारों बार मन में झांका
पर कहीं कमीं नजर न आई
मैं कहाँ गलत थी पहले
अब कहाँ परिवर्तन आया 
फिर क्यूँ मन में मलाल आया
 ऐसा ख्याल मन से
न निकाल पाई |
आशा


आशा

02 अगस्त, 2018

सपनों का संसार अनूठा


थकी हारी रात को 
जब नयन बंद करती 
पड़ जाती निढाल शैया पर 
जब नींद का होता आगमन  
स्वप्न चले आते बेझिझक !
यूँ तो याद नहीं रहते 
पर यदि रह जाते भूले से 
मन को दुविधा से भर देते 
मन में बार बार आघात होता 
होता ऐसा क्यूँ ? 
जब स्वप्न रंगीन होता 
मन प्रसन्नता से भरता 
पर जब देखती 
किसी अपने को सपने में  
चौंक कर उठ बैठती !
सोचती कहीं कुछ बुरा होने को है 
ज़रूरी नहीं हर स्वप्न 
कोई सन्देश दे !
भोर की बेला में 
जो स्वप्न दिखाई देते 
अधिकतर सच ही होते 
जहाँ कभी गए ही नहीं 
स्वप्नों में वे ही दिखाई देते !
पर एक बात ज़रूर होती 
चाहे जहाँ भी घूमती 
प्रमुख पात्र मैं ही होती ! 
कुछ लोग दिन में 
जागती आँखों से भी स्वप्न देखते 
दिवा स्वप्न में ऐसे व्यस्त होते 
कल्पना में खो जाते 
खुद की सुध बुध खो बैठते ! 

आशा सक्सेना