07 मई, 2010

कुछ लोग ऐसे भी होते है

कुछ लोग ऐसे भी होते हैं ,
जो कभी बड़े नहीं होते ,
मन की कुंठाओं को ढोते-ढोते ,
पार किये उम्र के कितने पड़ाव ,
पर बीच में कहीं ठिठक गये ,
मन में कई अवसाद लिये ,
बड़े कहलाने की चाहत
रखते हैं ,
पर संयत व्यवहार नहीं करते ,
कुंठाओं से नहीं उबर पाते ,
निंदा रस का स्वाद आत्मसात कर लेते हैं ,
पर निंदा का कोई अवसर ,
नहीं हाथ से जाने देते ,
हीन भावना के परिचायक ,
सब को तुच्छ समझते हैं ,
दुनियादारी से दूर बहुत ,
खुद को बहुत समझते हैं ,
दूरी सबसे रखते हैं ,
अहम भाव से भरे हुए ,
संकीर्ण मानसिकता के
पुरोधा होते हैं |


आशा

7 टिप्‍पणियां:

  1. बिलकुल सत्य कह रही हैं आप ! वाकई में कुछ लोग ऐसे ही होते हैं जो इसी मानसिकता से ग्रस्त होते हैं और समय समय पर जीवन में आपसे टकराते रहते हैं ! सबसे कष्टप्रद बात यह होती है कि ये सुधरने के लिए भी तैयार नहीं होते क्योंकि ये खुद को कभी गलत समझते ही नहीं ! एक सुन्दर और सार्थक पोस्ट !

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  2. इस टिप्पणी को लेखक द्वारा हटा दिया गया है.

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  3. वाकई कुछ लोग ऐसे होते है.
    सुन्दर रचना

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