09 अक्तूबर, 2010

लक्ष्मण रेखा

क्यूं बंद किया
लक्ष्मण रेखा के घेरे मै
कारण तक नहीं समझाया
ओर वन को प्रस्थान किया
यह भी नहीं सोचा
मैं हूँ   एक मनुष्य 
स्वतन्त्रता है अधिकार
यदि आवश्कता हुई
अपने को बचाना जानती
पर शायद यहीं मै गलत थी
अपनी रक्षा कर न सकी
 बचा न सकी खुद को रावण से
मैं कमजोर थी अब समझ गयी हूं
यदि तुम्हारा कहा सुन लिया होता
अनर्गल बातों से दुखित तुम्हें न किया होता
दहलीज पार न करती
हा राम हा राम कि आवाज सुन
राम तक पहुंचने के लिए
कष्ट मैं उन को  देख
सहायतार्थ जाने के लिए
तुम्हें बाध्य ना किया होता
मैं लक्ष्मण रेखा पार नहीं करती
रावण को भिक्षा देने के लिए
दहलीज  पार न करती
यह दुर्दशा नहीं होती
विछोह भी न सहना पड़ता
अग्नि परीक्षा से न गुजरना पड़ता
धोबी के कटु वचनों से
मन भी छलनी ना होता
क्या था सही ओर क्या गलत
अब समझ पा रही हूं
इसी दुःख का निदान कर रही हूं
धरती से जन्मी थी
फिर धरती में समा रही हूं |
आशा

9 टिप्‍पणियां:

  1. सीता की वेदना को अच्छे से अभिव्यक्त किया है ....

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  2. आदरणीया माँ जी
    नमस्कार !

    प्रेरक प्रस्तुति - अच्छा सन्देश.

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  3. बहुत अच्छी प्रस्तुति।
    या देवी सर्वभूतेषु शक्तिरूपेण संस्थिता।
    नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:।।
    नवरात्र के पावन अवसर पर आपको और आपके परिवार के सभी सदस्यों को हार्दिक शुभकामनाएं और बधाई!

    फ़ुरसत में …बूट पॉलिश!, करते देखिए, “मनोज” पर, मनोज कुमार को!

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  4. बहुत अच्छी प्रस्तुति। राजभाषा हिन्दी के प्रचार-प्रसार में आपका योगदान सराहनीय है!
    या देवी सर्वभूतेषु शक्तिरूपेण संस्थिता।
    नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:।।
    नवरात्र के पावन अवसर पर आपको और आपके परिवार के सभी सदस्यों को हार्दिक शुभकामनाएं और बधाई!

    मरद उपजाए धान ! तो औरत बड़ी लच्छनमान !!, राजभाषा हिन्दी पर कहानी ऐसे बनी

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  5. कदाचित सीता की ऐसी ही नारी सुलभ चंचलता और अविवेकी व्यवहार कुशलता को भाँप कर लक्ष्मण उन्हें लक्ष्मण रेखा के सुरक्षा घेरे में निरुद्ध कर गए थे ! लेकिन यह सब पूर्व नियोजित विधि का विधान था
    जिससे धरती को असुरों से मुक्त किया जा सके और सीताजी को इस प्रयोजन के किये यही भूमिका दी गयी थी ! सीता के मानवीय रूप का और उनके मानसिक द्वन्द का बहुत सुंदर चित्रण ! बहुत अच्छी अभिव्यक्ति ! बधाई एवं शुभकामनाएं

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  6. बहुत कुछ कभी कभी होना अपने बस में नही हॉट ... नियती करवाती है ... ये तो होना ही था क्योंकि सत्य की विजय जो होनी थी ...

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  7. आपकी रचनात्मक ,खूबसूरत और भावमयी
    प्रस्तुति कल के चर्चा मंच का आकर्षण बनी है
    कल (11/10/2010) के चर्चा मंच पर अपनी पोस्ट
    देखियेगा और अपने विचारों से चर्चामंच पर आकर
    अवगत कराइयेगा।
    http://charchamanch.blogspot.com

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  8. कल से बाहर था इसलिए इस पोस्ट को नही देख सका!
    --
    आपने बहुत ही उम्दा पोस्ट लगाई है!
    --
    इतिहास की गर्त से निकली इस रचना के लि्ए साधुवाद!
    --
    नवरात्रों की हार्दिक शुभकामनाएँ!
    --
    जय माता जी की!

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