10 मार्च, 2011

दंश का दर्द

कच्ची सड़क पर लगे पैर में कंटक
निकाल भी लिए
जो दर्द हुआ सह भी लिया |
पर हृदय में चुभे
शूल को निकालूँ कैसे
उसके दंश से बचूं कैसे |
जब हो असह्य वेदना
बहते आंसुओं के सैलाव को
रोकूं कैसे |
इस दंश का दर्द
जीवन पर्यन्त होना है
कैसे मुक्ति पाऊं उससे |
बिना हुए चोटिल
दोधारी तलवार पर चलना
और बच पाना उससे
होता है बहुत कठिन
पर असम्भव भी नहीं |
शायद वह भी सहन कर पाऊं
धरा सा धीरज रख पाऊं
और मुक्ति मार्ग पर चल पाऊं
बिना कोई तनाव लिए |

आशा

10 टिप्‍पणियां:

  1. असम्भव भी नहीं |
    शायद वह भी सहन कर पाऊं
    धरा सा धीरज रख पाऊं
    और मुक्ति मार्ग पर चल पाऊं
    बिना कोई तनाव लिए |

    अत्यंत गहन भाव --
    यही जीवन है -
    मुस्कुराते हुए जीना ही विजय है ....!!
    बहुत सुंदर रचना -
    बधाई एवं शुभकामनाएं .

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  2. शायद वह भी सहन कर पाऊं
    धरा सा धीरज रख पाऊं
    और मुक्ति मार्ग पर चल पाऊं
    बिना कोई तनाव लिए |

    बहुत गहन भाव लिये सुन्दर प्रेरक रचना..

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  3. बहुत खूबसूरत लिखा है आपने इसके लिए मई यही कहूँगा
    "जिंदगी तो जिंदगी है 'विद्यार्थी'
    खुशी कि हो
    या गम की,
    सूखे की हो
    या नम की,
    अधिक की हो
    या कम की,
    सबसे एक ही शब्द निकलता है
    चाह!"

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  4. दर्द को झेलने की प्रेरणा देती एक सार्थक एवं सकारात्मक रचना ! बहुत सुन्दर ! वाकई हौसला और इच्छाशक्ति हो तो असंभव कुछ भी नहीं !

    जवाब देंहटाएं
  5. ब्लॉग की दुस्निया में आपका हार्दिक स्वागत |
    बहुत ही सुन्दर लिखा है अपने |
    अप्प मेरे ब्लॉग पे भी आना के कष्ट करे
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  6. दर्द जब हद से अधिक बढ़ जाता है तो दवा बन जाता है |
    दिल के दर्द को स्पर्श करती हुई रचना|

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  7. aSHA JEE AP mahan maMTA maNDAL MEN SHAMIL HONE KE LIYE IS LINK KO OPEN KAREN :::

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  8. आदरणीया अम्मा आशा जी
    सादर प्रणाम !

    आशा है ,आप स्वस्थ-सानन्द हैं …

    हृदय में चुभे
    शूल को निकालूं कैसे ?
    उसके दंश से बचूं कैसे ?
    जब हो असह्य वेदना
    बहते आंसुओं के सैलाव को
    रोकूं कैसे ?


    आपके शब्द आंखों और हृदय को नम कर गए …
    मन के घाव आसानी से नहीं भरते …

    दोधारी तलवार पर चलना
    और बच पाना उससे
    होता है बहुत कठिन
    पर असम्भव भी नहीं …
    शायद वह भी सहन कर पाऊं
    धरा सा धीरज रख पाऊं
    और मुक्ति मार्ग पर चल पाऊं


    एक पुराना गीत याद आ रहा है …
    धरती की तरह हर दुःख सहले ,
    सूरज की तरह तू जलती जा …


    आपके जीवन में भरपूर सुख , हर्ष , प्रसन्नता , और संतुष्टि हो … तथास्तु !

    आगामी होली की हार्दिक शुभकामनाएं !
    साथ ही चार दिन पहले आ'कर गए
    विश्व महिला दिवस की हार्दिक बधाई !
    शुभकामनाएं !!
    मंगलकामनाएं !!!

    ♥मां पत्नी बेटी बहन;देवियां हैं,चरणों पर शीश धरो!♥



    - राजेन्द्र स्वर्णकार

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  9. आदरणीय आशा माँ
    नमस्कार
    गहन भाव लिये सुन्दर प्रेरक रचना

    जवाब देंहटाएं

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