29 जून, 2011

है यही रीत दुनिया की


हरीतिमा वन मंडल की

अपनी ओर खींच रही थी

मौसम की पहली बारिश थी

हल्की सी बूंदाबांदी थी

तन भीगा मन भी सरसा

जब वर्षा में तेजी आई

पत्तों को छू कर बूंदे आईं |

पगडंडी पर पानी था

फिर भी पास एक

सूखा साखा पेड़ खडा था

था पत्ता विहीन

था तना भी बिना छाल का |

उसमें कोई तंत न था

जीवन उसका चुक गया था

कई टहनियाँ काट कर

ईंधन बनाया उन्हें जलाया

जब भी कोई उसे देखता

सब नश्वर है यही सोचता |

पहले जब वह हरा भरा था

कई पक्षी वहाँ आते थे

अपना बसेरा भी बनाते थे

चहकते थे फुदकते थे

मीठे फल उसके खाते थे

जो फल नीचे गिर जाते थे

पशुओं का आहार होते थे |

घनी घनेरी डालियाँ उसकी

छाया देती थीं पथिकों को

था वह बहुत उपयोगी

सभी यही कहते थे |

पर आज वह

ठूंठ हो कर रह गया है

सब ने अनुपयोगी समझ

उसका साथ छोड़ दिया है

है यही रीत दुनिया की

उसे ही सब चाहते हैं

जो आए काम किसी के

उपयोगिता हो भरपूर

तभी मन भाए सभी को |

जैसे ही मृत हो जाए

जो कुछ भी पास था

वह भी लूट लिया जाता है

कुछ अधिकार से

कुछ अनाधिकार चेष्टा कर

अस्तित्व मिटा देते हैं उसका

वह आज तो ठूंठ है

कल शायद वह भी न रहेगा

लुटेरों की कमी नहीं है

उनको खोजना न पड़ेगा |

आशा

23 टिप्‍पणियां:

  1. Man bhavuk ho gya rachana padhte-padhate , duniya ki reet ankho ke aage ghumne laga. sundar rachanadhate , duniya ki reet ankho ke aage ghumne laga. sundar rachana

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  2. बहुत सुन्दर भाव हैं इस रचनाके| आंखिर में मानव जीवन का भी तो यही हाल होता है|

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  3. वह भी लूट लिया जाता है

    कुछ अधिकार से

    कुछ अनाधिकार चेष्टा कर

    अस्तित्व मिटा देते हैं उसका
    bahut sundar bhav

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  4. बहुत सुन्दर भावपूर्ण रचना..मानव जीवन भी कुछ अलग तो नहीं..

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  5. अधिकार, अस्तित्व, अपेक्षा, आकांक्षा, अहमियत बस यही सब तो बुनते हैं जीवन की चुनरिया को

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  6. जैसे ही मृत हो जाए

    जो कुछ भी पास था

    वह भी लूट लिया जाता है

    कुछ अधिकार से

    कुछ अनाधिकार चेष्टा कर

    अस्तित्व मिटा देते हैं उसका

    वह आज तो ठूंठ है

    कल शायद वह भी न रहेगा

    लुटेरों की कमी नहीं है

    उनको खोजना न पड़ेगा |
    hai yahi reet

    जवाब देंहटाएं
  7. आह! मार्मिक और हृदयस्पर्शी अभिव्यक्ति.
    मन को आंदोलित कर रही है.
    सुन्दर चित्र सकून दे रहा है.
    मेरे ब्लॉग की नई पोस्ट पर आपका स्वागत है.

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  8. मानुष जीवन एवं वृक्ष की बड़ी सुन्दर दार्शनिक तत्व से परिपूर्ण बेहतरीन रचना ! अति सुन्दर !

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  9. आदरणीय आशा माँ
    नमस्कार !
    ........बहुत सुन्दर भावपूर्ण रचना....

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