12 जुलाई, 2011

ऐसा क्यूँ होता है


है कारण क्या परेशानी का

उदासी की महरवानी का

गर्मीं में अहसास सर्दी का

गहराती नफरत में छिपे अपनेपन का |

कभी आकलन न किया

जो कुछ हुआ उसे भुला दिया

फिर भी कहीं कुछ खटकता है

मन बेचारा कराहता है |

है कारण क्या

चाहता भी है जानना

पर दूर कहीं उससे

चाहता भी है भागना |

गहरी निराशा

पंख फैलाए आती है

मन आच्छादित कर जाती है

रौशनी की किरण कोइ

दूर तक दिखाई नहीं देती |

सिहरन सी होने लगती है

विश्वास तक

डगमगा जाता

मन आक्रान्त कर जाता |

क्या खोया कितना खोया

यह महत्त्व नहीं रखता

बस एक ही विचार आता है

क्यूँ होता है ऐसा

उसी के साथ हर बार |

आशा

18 टिप्‍पणियां:

  1. आशा और निराशा के बीच ...डगमगाते मन की खूबसूरत प्रस्तुति ..........आभार

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  2. गर्मीं में अहसास सर्दी का

    गहराती नफरत में छिपे अपनेपन का |

    कभी आकलन न किया

    जो कुछ हुआ उसे भुला दिया

    मन के द्वंद्व को कहती अच्छी रचना

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  3. कभी आकलन न किया
    जो कुछ हुआ उसे भुला दिया
    फिर भी कहीं कुछ खटकता है
    मन बेचारा कराहता है |

    Beautiful lines..
    Loved it

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  4. क्या खोया कितना खोया

    यह महत्त्व नहीं रखता

    बस एक ही विचार आता है

    क्यूँ होता है ऐसा

    उसी के साथ हर बार |


    मन में उठती अनेक भावनाएं ....
    सुंदर वर्णन ..

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  5. बहुत ही उम्दा लेखन और उत्तम शैली है आपकी लेखनी मे

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  6. बहुत सुंदर प्रस्तुति

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  7. जीवन में स्वाभाविक रूप से आते हुये झंझावातों को कोमलता से अभिव्यक्ति दी है.अति-सुंदर.

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  8. ऐसा इसीलिये होता कि शायद आशा निराशा कि झूले में झूलना हर इंसान की नियति होती है और इससे बचा नहीं जा सकता ! मन की उथल-पुथल को खूबसूरती से अभिव्यक्त करती सुन्दर रचना ! बधाई !

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  9. मन के द्वंद का खूबसूरत चित्रण किया है।

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  10. अन्तर्मन के अंतर्द्वंद के बाद की स्थिति साँप-छछूंदर जैसी ही होती है|

    कहीं कुछ है, जो हमसे बात करता है तन्हाई में|
    जो बन के अश्क़, आँखों से उतरता है तन्हाई में|
    इसी का नाम है शायद, ज़मीरेआदमी यारो|
    हमारे दिल में यां से वां गुजरता है तन्हाई में||

    बधाई सुंदर प्रस्तुति के लिए|

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  11. बहुत सुंदर प्रस्तुति,
    आभार,

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  12. मन बेचारा कराहता है |
    है कारण क्या
    चाहता भी है जानना
    पर दूर कहीं उससे
    चाहता भी है भागना ||
    bahoot khoob :)
    :clap: :clap:
    ________________________________
    वो स्कूल का गुज़रा ज़माना ||

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  13. बहुत सुंदर प्रस्तुति....बधाई

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  14. विचारशील सृजन मनमोहक है सुन्दर कथ्य ,व शब्द संयोजन ,सराहनीय है ....शुक्रिया जी /

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  15. बहुत सुन्दर प्रश्न है आपका आशा जी उत्तर के लिए दिल की गहराइयों में जाना होगा

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  16. सत्य कहा....हादसे सहते सहते कराहता मन बस यही तो पूछता है बार बार.......

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