11 सितंबर, 2011

मुस्कान रूठ जाएगी


जाने कितनी यादें

दिल में समाई

जब भी झांका वहाँ

तुम ही नजर आए |

वे सुनहरे दिन

वे उल्हाने वे वादे

सारा चैन हर लेते थे

जाने कब पलक झपकती थी

कब सुबह हो जाती थी |

स्वप्नों के झूलों में झूली

राह देखना तब भी न भूली

अधिक देर यदि हो जाती

बहुत व्यथित होती जाती |

द्वार पर होती आहट

मुझे खींच ले जाती तुम तक

नज़रों से नजरें मिलते ही

कली कली खिल जाती |

वे बातें कल की

भूल न पाई अब तक

हो आज भी करीब मेरे

पर प्यार की वह उष्मा

हो गयी है गुम |

कितने बदल गए हो

दुनियादारी में उलझे ऐसे

उसी में खो गए हो

सब कुछ भूल गए हो |

कोइ प्रतिक्रया नहीं दीखती

भाव विहीन चेहरा रहता है

गहन उदास चेहरा दीखता है

हंसना तक भूल गए हो |

इस दुनिया में जीने के लिए

ग्रंथियों की कुंठाओं की

कोइ जगह नहीं है

उन्हें भूल ना पाओ

ऐसी भी कोइ वजह नहीं है |

खुशियों को यदि ठोकर मारी

वे लौट कर न आएंगी

जीवन बोझ हो जाएगा

मुस्कान रूठ जाएगी |

आशा

24 टिप्‍पणियां:

  1. बहुत सुंदर ...सार्थक ...सीख देती हुई रचना ...आपकी रचनाओं में जीवन का सार निहित होता है ...
    शुभकामनायें...

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  2. जब भी झांका वहाँ

    तुम ही नजर आए |

    वे सुनहरे दिन

    वे उल्हाने वे वादे

    सारा चैन हर लेते थे ....


    ये मीठी यादें ही तो हमारी दौलत है।

    .

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  3. आपके इस सुन्दर प्रविष्टि की चर्चा दिनांक 12-09-2011 को सोमवासरीय चर्चा मंच पर भी होगी। सूचनार्थ

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  4. बहुत भावपूर्ण कविता| धन्यवाद|

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  5. बहुत ही खूबसूरत एवं भावपूर्ण रचना ! मन प्रसन्न हो गया पढ़ कर ! बधाई !

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  6. खुशियों को यदि ठोकर मारी
    वे लौट कर न आएंगी
    जीवन बोझ हो जाएगा
    मुस्कान रूठ जाएगी |


    जीवन्त विचारों की बहुत सुन्दर एवं मर्मस्पर्शी रचना !

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  7. इस दुनिया में जीने के लिए

    ग्रंथियों की कुंठाओं की

    कोइ जगह नहीं है

    उन्हें भूल ना पाओ
    ऐसी भी कोइ वजह नहीं है

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  8. zindagi ke ek padav ko bakhoobi ukera hai ......sundar bhaavavyakti.

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  9. सार्थक शिक्षा...
    सुन्दर रचना...
    सादर...

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  10. खुशियों को यदि ठोकर मारी
    वे लौट कर न आएंगी
    जीवन बोझ हो जाएगा
    मुस्कान रूठ जाएगी ।

    खुशियां ही जीवन को आसान बनाती हैं।
    अच्छी कविता।

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  11. कई दिनों बाद आया आप के ब्लॉग पर आते ही एक और सुंदर कविता पढ़ने को मिली। बधाई दीदी।

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  12. खुशियों को यदि ठोकर मारी
    वे लौट कर न आएंगी
    जीवन बोझ हो जाएगा
    मुस्कान रूठ जाएगी |

    जिंदगी के अनुभवों से सीख लेती सुंदर प्रस्तुति.

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  13. हंसना तक भूल गए हो |

    इस दुनिया में जीने के लिए

    ग्रंथियों की कुंठाओं की

    कोइ जगह नहीं है

    उन्हें भूल ना पाओ

    ऐसी भी कोइ वजह नहीं है |
    भाव की विश्लेषण प्रधान भाव पूर्ण प्रस्तुति ,जीवन की आंच बचाए रखने का नुश्खा .

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  14. बहुत सुन्दर भावाभिव्यक्ति ...

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  15. बहत ख़ूबसूरत और भावपूर्ण रचना |

    मेरे ब्लॉग में भी पधारें |
    **मेरी कविता**

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  16. सुन्दर रचना आपकी, नए नए आयाम |
    देत बधाई प्रेम से, प्रस्तुति हो अविराम ||

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  17. खुशियों को यदि ठोकर मारी

    वे लौट कर न आएंगी

    जीवन बोझ हो जाएगा

    मुस्कान रूठ जाएगी |


    -बिल्कुल सही बात...उम्दा रचना.

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