27 अक्तूबर, 2011

कुछ विचार बिखरे बिखरे

पहले उसे अपना लिया ,फिर निमिष में बिसरा दिया
अनुरोध निकला खोखला ,प्रिय आपने यह क्या किया |

बीती बातें वह ना भूला ,कोशिश भी की उसने
इन्तजार भी कब तक करता ,गलत क्या किया उसने |

है आज बस अनुरोध इतना ,घर में आकार रहिये
रूखा सूखा जो वह खाता ,पा वही संतुष्ट रहिये |

आज छत्र छाया में तुम्हारी ,अभय दान मिले मुझे
पाऊँ जो आशीष तुम्हारा ,कहीं रहे ना भय मुझे |

जो भी थे कल तक तुम्हारे ,वे किसी के हो गए
इन्तजार व्यर्थ लगता उनका ,जो दुखी कर चल दिए |
आशा


11 टिप्‍पणियां:

  1. "पर्व नया-नित आता जाता" उच्चारण पर लिखा
    जो कहीं कोई याद करता ,थके क़दमों से दिखा
    बिखरे बिखरे विचार कुछ हैं, वो दिल से रहा बता |
    दिग्भ्रमित सी देख दिशाएँ, अब बदली रही सता ||

    आपकी उत्कृष्ट पोस्ट का लिंक है क्या ??
    आइये --
    फिर आ जाइए -
    अपने विचारों से अवगत कराइए ||

    शुक्रवार चर्चा - मंच
    http://charchamanch.blogspot.com/

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  2. सुन्दर प्रस्तुति
    दिवाली, भाई दूज और नव वर्ष की शुभकामनायें

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  3. भावपरक कविता

    आपको दीपावली एवं नववर्ष की सपरिवार ढेरों शुभकामनाएं !

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  4. बहुत सुन्दर!
    दीपावली, गोवर्धनपूजा और भातृदूज की शुभकामनाएँ!

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  5. बिखरे बिखरे से विचार सिमट गए ..

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  6. जीवन के यथार्थ को समेटे एक बहुत ही सुन्दर, कोमल एवं प्यारी रचना ! प्रकाश पर्व की हार्दिक शुभकामनायें !

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  7. सुंदर प्रस्तुति अर्थपूर्ण रचना ....समय मिले कभी तो आयेगा मेरी पोस्ट पर आपका स्वागत है
    http://mhare-anubhav.blogspot.com/2011/10/blog-post_27.html

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