23 नवंबर, 2011

कैसा जीवन पथ




हम दौनों के बीच
यह कैसी दरार पड़ गयी
प्यार नाम की चिड़िया
कहीं कूच कर गयी |
पत्ता डाल से टूटा
सभी कुछ बेगाना लगा
जाने कब सांझ उतर आई
गुत्थी और उलझ गयी |
जितना भी सुलझाना चाहा
ऊन सी उलझती गयी
कंगन की गांठों की तरह
और अधिक कसती गयी |
एक हाथ से न खुल पाई
झटका दिया तोड़ डाला
है तेरी यह रुसवाई कैसी
सारी खुशियाँ ले गयी |
ना गिला ना कोइ शिकवा
फिर भी दूरी बढ़ गयी
जीवन की मधुरता को
जाने किसकी नज़र लगी |
आशा

16 टिप्‍पणियां:

  1. जिंदगी पहेली की तरह ही होती है.....

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  2. आदरणीय आशा माँ
    नमस्कार !
    मन को गहराई तक छूती बेहतरीन रचना !

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  3. कभी कभी ये दौर भी आता है .. अच्छी प्रस्तुति

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  4. ज़िन्दगी पास हो कर भी कभी कभी कितनी दूर होती है!

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  5. बहुत सुन्दर प्रस्तुति ||

    बधाई महोदय ||

    dcgpthravikar.blogspot.com

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  6. सुन्दर रचना ! ऐसा भी कभी-कभी होता है ! लेकिन प्रयत्न करने पर सब ठीक भी हो जाता है ! एक यथार्थवादी सच्ची रचना ! बधाई एवं शुभकामनायें !

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  7. ऐसी नौबत तो जिन्दगी में आ ही जाती है लेकिन प्रयास यह करना चाहिए कि ----
    रहिमन धागा प्रेम का, मत तोड़ो चटकाय।
    टूटे से फिर ना जुड़े, जुड़े गाँठ परि जाय॥

    सुन्दर रचना !

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  8. Life is like that only...Everything is not in our hands...All we can do is to accept the situations coming our way...

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  9. पत्ता डाल से टूटा
    सभी कुछ बेगाना लगा
    जाने कब सांझ उतर आई
    गुत्थी और उलझ गयी |

    बहुत सुन्दर !
    आभार !

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  10. आपकी पोस्ट आज के चर्चा मंच पर प्रस्तुत की गई है
    कृपया पधारें
    चर्चा मंच-708:चर्चाकार-दिलबाग विर्क

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  11. भावमयी सुन्दर रचना...
    सादर बधाई...

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  12. दिल को छू गई पंक्तियाँ। धन्यवाद

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  13. आपकी पोस्ट आज की ब्लोगर्स मीट वीकली के मंच पर प्रस्तुत की गई है /आप आइये और अपने अनमोल संदेशों के द्वारा हमारा उत्साह बढाइये/आप हिंदी की सेवा इसी तरह अपने मेहनत और लगन से लिखी गई रचनाओं द्वारा करते रहें यही कामना है /आभार /लिंक नीचे दिया गया है /
    http://hbfint.blogspot.com/2011/11/19-happy-islamic-new-year.html

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  14. मित्रों चर्चा मंच के, देखो पन्ने खोल |
    आओ धक्का मार के, महंगा है पेट्रोल ||
    --
    बुधवारीय चर्चा मंच

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