10 दिसंबर, 2011

है नाम जिंदगी इसका


बोझ क्यूँ समझा है इसे
है नाम जिंदगी इसका
सोचो समझो विचार करो
फिर जीने की कोशिश करो |
यत्न व्यर्थ नहीं जाएगा
जिंदगी फूल सी होगी
जब समय साथ देगा
जीना कठिन नहीं होगा |
माना कांटे भी होंगे
साथ कई पुष्पों के
दे जाएगे कभी चुभन भी
इस कठिन डगर पर |
फिर भी ताजगी पुष्पों की
सुगंध उनके मकरंद की
साथ तुम्हारा ही देगी
तन मन भिगो देगी |
होगा हर पल यादगार
कम से कमतर होगा
कष्टों का वह अहसास
जो काँटों से मिला होगा |
सारा बोझ उतर जाएगा
छलनी नहीं होगा तन मन
कठिन नहीं होगा तब उठाना
इस फूलों भरी टोकरी को |
आशा




10 टिप्‍पणियां:

  1. बोझ क्यूँ समझा है इसे
    है नाम जिंदगी इसका
    सोचो समझो विचार करो
    फिर जीने की कोशिश करो |
    बिलकुल सही कह रही हैं आप. सुंदर सन्देश देती खूबसूरत रचना.

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  2. फूलों भरी टोकड़ी ..जिन्दगी ..कमाल बिम्ब..कमाल रचना..

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  3. jindagi ko aise hee hausalon kee jarurat hai..bahtarin rachna..sadar badhayee

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  4. कोमल भावो की अभिवयक्ति......

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  5. इस पोस्ट के लिए धन्यवाद । मरे नए पोस्ट :साहिर लुधियानवी" पर आपका इंतजार रहेगा ।

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  6. बहुत सुन्दर भावभिव्यक्ति!
    --
    आशा जी अपने बारे में कुछ मेल में मुझे भेजिए।
    मैं तो आपके बारे में इतना ही जानता हूँ कि आप मेरी पसंदीदा कवयित्री श्रीमती ज्ञानवती सक्सेना की पुत्री हैं।

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  7. बहुत सुन्दर संदेश देती सार्थक रचना जीजी ! आज जीवन में इसी आशावादी सोच की बहुत ज़रूरत है ! बधाई एवं शुभकामनायें !

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  8. ज़िंदगी को जीना सिखाती सुन्दर रचना ..

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  9. जिंदगी जीने का बेहतरीन फलसफा......

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