05 फ़रवरी, 2012

प्रतीक्षा

                                                                                                 
ह्रदय  पटल पर
अंकित शब्द 
जो  कभी सुने थे 
यादों  में ऐसे बसे 
कि  भूल नहीं पाता
कहाँ कहाँ नहीं भटका 
खोज  में उसकी 
मिलते  ही 
क्यूँ न बाँध लूं 
उसे  स्नेह पाश में 
जब  भी किसी
गली तक पहुंचा
मार्ग अवरुद्ध मिला
जब उसे नहीं पाया 
हारा  थका लौट आया 
आशा  का दामन न छोड़ा
लक्ष्य  पर अवधान रहा
आगे क्या करना है
बस यही मन में रहा 
हो  यदि दृढ़ इच्छा शक्ति
होता कुछ भी नहींअसंभव
फिर भी यदि
वह नहीं मिल पाई
आस का दीपक जला 
चिर  संध्या तक 
प्रतीक्षा करूँगा
आशा














29 टिप्‍पणियां:

  1. asha ji aap ko sabse pahli meri bdhaai....
    sun kar khushi huee ke aap itna likh chuki hai,itni rachnayen kafi wqt me likhi hogin aap ne,apne itne lmbe anubhav par bhi koi lekh likhiye

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  2. बहुत-बहुत बधाई.......खुबसूरत रचना अभिवयक्ति.........

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  3. बधाई
    बहुत सुन्दर प्रस्तुति
    आपकी इस सुन्दर प्रविष्टि की चर्चा कल दिनांक 06-02-2012 को सोमवारीय चर्चामंच पर भी होगी। सूचनार्थ

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  4. बहुत सुन्दर भावप्रणव अभिव्यक्ति!
    500वीं पोस्ट की बधाई स्वीकार करें!

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  5. हो यदि दृढ़ इच्छा शक्ति
    होता कुछ भी नहींअसंभव.बधाई
    बहुत सुन्दर प्रस्तुति.

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  6. ५०० रचनायें पाठकों तक पहुँचाने का जो कीर्तिमान आपने स्थापित किया है उसके लिये ढेर सारी बधाइयाँ और शुभकामनायें ! यह रचना भी बहुत ही खूबसूरत और सारगर्भित है बन पड़ी है !
    हो यदि दृढ़ इच्छा शक्ति
    होता कुछ भी नहींअसंभव !

    बहुत ही प्रेरक पंक्तियाँ ! आभार आपका

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  7. हर बार की तरह ...इस बार भी बहुत अच्छे से हर शब्द को रचा है आपने ...आशा माँ .......आपका अनुभव आपके शब्दों में झलकता हैं ...


    आपके इस सफर के लिए ...दिल से बधाई आपको

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  8. sachche dil ki pratiksha jaroor falibhoot hoti hai.bahut sundar rachna.

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  9. जब लगन ऐसी हो,तो कोई कारण नहीं कि आराध्य न मिले।

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  10. bahut hi sundar chitaran sath hi gahan chaintan ko vadhy karati rachana ....sadar abhar.

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  11. बहुत सुन्दर भावमयी प्रस्तुति...

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  12. हो यदि दृढ़ इच्छा शक्ति
    होता कुछ भी नहींअसंभव
    फिर भी यदि
    वह नहीं मिल पाई
    आस का दीपक जला
    चिर संध्या तक
    प्रतीक्षा करूँगा
    आशा

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  13. हो यदि दृढ़ इच्छा शक्ति
    होता कुछ भी नहींअसंभव
    फिर भी यदि
    वह नहीं मिल पाई
    आस का दीपक जला
    चिर संध्या तक
    प्रतीक्षा करूँगा
    आशा
    कागा सब तन खाइयो ,चुन चुन खइयो मांस
    दो नैना मत खाइयो ,पीया मिलन की आस .
    इंतज़ार पर बहुत अच्छी रचना है .अप्राप्य ही हर दम साथ रहता है .

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  14. आशा का दमन नहीं छोड़ना
    है हर नहीं मानना है
    बहुत बेहतरीन

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  15. ५०० वी पोस्ट के लिए बधाई ..
    सुन्दर रचना है ..
    कभी हमारे भी ब्लॉग पर आइयेगा,आपका स्वागत है ...

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  16. आपकी लिखी रचना "सांध्य दैनिक मुखरित मौन में" आज मंगलवार 22 दिसंबर 2020 को साझा की गई है.... "सांध्य दैनिक मुखरित मौन में" पर आप भी आइएगा....धन्यवाद!

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  17. 500 वी पोस्ट की बहुत बहुत बधाई, आशालता दी।

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  18. बहुत सुन्दर सृजन...
    500वीं पोस्ट की बधाई आपको।

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