07 फ़रवरी, 2012

साथ चला साये सा

है मृत्यु कितनी दुखदाई 
अहसास  उसका इससे भी गहरा 
उर  में छिपे ग़मों को  
बाहर  आने नहीं देता |
पहचान  हुई जब से 
 साथ नहीं छोड़ा 
  साथ  चला साये सा 
लगने   लगी रिक्तता उसके बिना |
है  दुनिया बाजार ग़मो का 
जगह  जगह वे बिकते 
कई  होते खरीदार 
विक्रेता  बेच कर चल देते |
कहाँ  कहाँ नहीं भटका
अशांत मन लिए
काँटों  के अलावा कुछ न मिला
सीना  छलनी हुआ 
तब  उन्हीं ने साथ  दिया |
यदि है  यही दस्तूर  दुनिया का
हम भी उनका साथ न छोड़ेंगे 
छिपा  कर दिल में उन्हें  
साथ उन्हीं  के जी लेंगे |
आशा 




















17 टिप्‍पणियां:

  1. किसी के साथ जीने से यदि सुख का एहसास मिले तो जीवन भर साथ नहीं छोड़ना चाहिए ... अच्छे भाव लिए रचना ...

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  2. बहुत सुन्दर प्रस्तुति !

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  3. हम भी उनका
    साथ न छोड़ेंगे
    छिपा कर दिल में उन्हें
    उन्हीं के साथ जी लेंगे |
    गहन भाव... आभार

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  4. हम भी उनका
    साथ न छोड़ेंगे
    छिपा कर दिल में उन्हें
    उन्हीं के साथ जी लेंगे |very nice.

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  5. हम भी उनका
    साथ न छोड़ेंगे
    छिपा कर दिल में उन्हें
    उन्हीं के साथ जी लेंगे |बहुत सुंदर मन के भाव ...
    प्रभावित करती रचना ...

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  6. बहुत ही सुन्दर ,प्रसंसनीय रचना....

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  7. बहुत सुन्दर प्रस्तुति!
    घूम-घूमकर देखिए, अपना चर्चा मंच
    लिंक आपका है यहीं, कोई नहीं प्रपंच।।
    --
    आपकी इस प्रविष्टी की चर्चा आज बुधवार के चर्चा मंच पर लगाई गई है!

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  8. बढ़िया रचना ! जूझने का और मैदान न छोड़ कर डटे रहने का यही जज़्बा होना चाहिये लेकिन हताशा के साथ नहीं आत्मविश्वास के साथ ! सुन्दर रचना !

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  9. गहन भाव..
    बहुत सुन्दर प्रस्तुति...!

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  10. लगने लगी रिक्तता
    गम के बिना |
    है दुनिया बाजार ग़मो की

    सच कहा आपने गम के बिना भी शायद जिंदगी बेरंग हो जाती

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  11. मृत्य और दुःख को जितना सोंचेगे उतना ही कष्ट होगा ....जीवन जैसा हैं वैसे ही स्वीकार करके चलेगे ...तभी जीना आसान होगा ....आभार

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  12. sundar kavita
    है दुनिया बाजार ग़मो की
    जगह जगह वे बिकते
    कई होते खरीदार
    विक्रेता बेच कर चल देते

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