08 फ़रवरी, 2012

क्षणिकाएं

(१)
जज्बा प्रेम का 
जुनून  उसे पाने का 
भय  उसे  खोने का
कह जाता बहुत कुछ 
उसके  होने का |
(२)
सारी  दुनिया एक तरफ 
प्रेम  अकेला एक तरफ
फिर भी सबसे शक्तिशाली
दुनिया उसके आगे हारी |
(३)
प्रेम  की है परिभाषा 
 आज के सन्दर्भ में
भोगी ,भोग्या और भोग
बस यही है प्रेम रोग |
(४) 
सुंदरता  का पैमाना
प्रेम ने नहीं माना 
जो  केवल मन भाया 
अपना उसे बना पाया |
आशा 








16 टिप्‍पणियां:

  1. सुन्दर, सार्थक और सटीक क्षणिकायें ! बहुत सुन्दर !

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  2. कल 10/02/2012 को आपकी यह पोस्ट नयी पुरानी हलचल पर लिंक की जा रही हैं.आपके सुझावों का स्वागत है .
    धन्यवाद!

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  3. बहुत सुन्दर सटीक क्षणिकायें|

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  4. बहुत सुन्दर सटीक क्षणिकायें|

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  5. इतनी सुन्दर गहरी बात इन क्षणिकाओ के जरिये .
    बहुत सुन्दर ....
    कहना तो बहुत कुछ चाहती हु पर ,
    तारीफ के लिए शब्द नहीं....
    बेमिसाल , बेहतरीन ....

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  6. बहुत सुन्दर आशा जी...
    प्रेम पगी क्षणिकाएं..

    सादर.

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  7. सुंदरता का पैमाना
    प्रेम ने नहीं माना
    जो केवल मन भाया
    अपना उसे बना पाया |
    सुन्दर भाव... लाजवाब... सादर

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  8. बहुत ही सुन्दर क्षणिकाएं!

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  9. maaf kariyega park mein ek din pahle kisi ne kaafi gandagi faila di thi hamne aapka hi 4.30 tak intejaar kiya aur fir hum baba ki dargaah ke samane vale geeta medical mein chale gaye aur vaha meeting kari.aapka number bhi nahi tha aur suresh ji thoda late aye the. maafi chahta hun mein

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  10. बहुत खूब कहा है आपने ... आभार ।

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  11. बहुत खूबसूरत और भावाभिव्यक्ति से सराबोर! हर पंक्ति गहराई लिए हुए सार्थकता की परिचायक! साधुवाद!
    डॉ. पुरुषोत्तम मीणा 'निरंकुश'

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