14 मार्च, 2012

रंग अमन चैन का

इन्द्रधनुषी  छटा बिखरी
प्रकृति के हर कौने में
विविध रंगों में रंगी
प्रकृति नटी स्वप्नों में
सतरंगी चूनर पहन
विचरण करती मधुवन में
सारे रंग सिमटने लगे 
एक अनोखे रंग में
शुभ्र चन्द्र की धवल चांदनी
बिखरी जल थल और नभ में
धवल हुआ अम्बर
लिपटी अवनी श्वेत आवरण में
ढकी बर्फ से पर्वत माला
श्वेत दिखी जल की धारा
मुखरित शान्ति का भाव हुआ
एक अद्भुद अनुभव हुआ
देखे श्वेत कपोत गगन में
देते सन्देश शान्ति का
सदभाव के प्रतीक वे
सन्देश वाहक अमन चैन के
छोड़ कर संकीर्णता
दृष्टि विहंगम जब डाली
तभी दुनिया देखी रंगों की
है हरा रंग हरियाली का
दुनिया में खुशहाली का
लाल रंग प्रेम का ऐसा
 लग जाए तो  छूटे ना
केशरिया रंग शौर्य  का
समर क्षेत्र की आवश्यकता
काले रंग से भय लगता
अन्धकार में कुछ न दीखता
श्वेत रंग अमन चैन का
इसमें समाहित सभी रंग
सभी को आत्मसात करता
है नायाब तरीका भाईचारे का
आपस में हिलमिल रहने का |
आशा

15 टिप्‍पणियां:

  1. सुन्दर प्रस्तुति !

    आभार !

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  2. हर रंग का अपना महत्व है ...
    सुंदर रंगमय प्रस्तुति ....
    आभार ..!

    जवाब देंहटाएं
  3. आपकी पोस्ट कल 15/3/2012 के चर्चा मंच पर प्रस्तुत की गई है
    कृपया पधारें
    http://charchamanch.blogspot.com
    चर्चा मंच-819:चर्चाकार-दिलबाग विर्क

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  4. बहुत सुंदर रचना ... प्रकृति के रंग में रंगी ...

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  5. बहुत सुन्दर रचना..
    रंग और जीने के ढंग दोनों ही....

    सादर.

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  6. हर रंग की महिमा दर्शाती सुन्दर रचना ! बधाई !

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  7. इसमें समाहित सभी रंग
    सभी को आत्मसात करता
    है नायाब तरीका भाईचारे का
    आपस में हिलमिल रहने का
    wah.....kya baat hai.

    जवाब देंहटाएं
  8. सभी रंगों की अपनी सुंदरता है...बहुत सुंदर और सकारात्मक अभिव्यक्ति..आभार

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  9. बहुत सुन्दर प्रस्तुति... आशाजी आपकी पुस्तक "अनकहा सच "के प्रकाशन के लिए आपको बहुत-बहुत बधाई और हार्दिक शुभकामनाएं...

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  10. वाह बहुत खूबसूरत प्रस्तुति ...
    आशा माँ ....आपके संग्रह "अनकहा सच "के प्रकाशन के लिए आपको बहुत-बहुत बधाई

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