25 सितंबर, 2012

हताशा



असफलता और बेचारगी
बेरोजगारी की पीड़ा से 
वह भरा हुआ हताशा से
है असंतुष्ट सभी से
दोराहे पर खडा
 सोचता किसे चुने
सोच की दिशाएं
विकलांग सी हो गयी
गुमराह उसे कर गयी
नफ़रत की राह चुनी
कंटकाकीर्ण सकरी पगडंडी
गुमनाम उसे कर गयी
तनहा चल न पाया
साये ने भी साथ छोड़ा
उलझनो में फसता गया
जब मुड़ कर पीछे देखा
बापिसी की राह न मिली
बीज से  विकसित 
पौधे नफ़रत के
दूर सब से ले आए
फासले इतने बढ़े कि
अपने भी गैर हो गए
हमराही कोई न मिला
अकेलापन खलने लगा 
अहसास गलत राह  चुनने का
अब मन पर हावी हुआ
सारी राहें अवरुद्ध पा
टीस इतनी बढ़ी कि
खुद से ही नफ़रत होने लगी |





19 टिप्‍पणियां:

  1. उत्कृष्ट प्रस्तुति बुधवार के चर्चा मंच पर ।।

    जवाब देंहटाएं
  2. bahut hi prabhawshali rachna...berojgari wakai mein ajeeb sa padaw hai jindgi ka..kavita ke roop mein bahut hi prasanshneey tarike se dhala hai ADBHUT...

    जवाब देंहटाएं
  3. एक आतंकवादी की मनोव्यथा झलकाती रचना -अंततः स्वयं के प्रति भी नफरत उसके हिस्से में आती है

    जवाब देंहटाएं

  4. गुमनाम उसे कर गयी/उलझनो(उलझनों )..... में फसता गया/
    एक नक्सली /आतंकी /मूल्य च्युत युवा की हताशा झलकती है इन पंक्तियों में .हमारे ब्लॉग जगत में माननीया बिंदी /चन्द्र बिंदु /अनुस्वार /अनुनासिक की बहुत अनदेखी हो रही है .सम्पादन में आप भी सहयोग करें .शुक्रिया बढ़िया रचना पढवाई .

    ram ram bhai
    । कंटकाकीर्ण सकरी(संकरा )... पगडंडी
    मुखपृष्ठ

    मंगलवार, 25 सितम्बर 2012
    आधे सच का आधा झूठ

    जवाब देंहटाएं
  5. कंटकाकीर्ण सकरी(संकरी ) पगडंडी......संकरी / उलझनो(उलझनों ) में फसता गया.....

    एक नक्सली /आतंकी की हताशा फलीभूत हुई है इस रचना में .हिंदी की बिंदी /चन्द्र बिंदु का अपना सौन्दर्य बोध है पटा नहीं क्यों अनुस्वार /अनुनासिक से लोग छिटक रहें हैं .

    हम नव -मीडिया के पुरोधा हैं वर्तनी तो हमें सुधारनी ही होगी सम्पादक भी हैं न .सबका सहयोग अपेक्षित है .

    बहुत बढ़िया रचना है आशा सक्सेना जी की .बधाई .

    जवाब देंहटाएं
  6. जिंदगी में गलत निर्णय लेने पर मानव के पश्चाताप से ग्रसित मनोदशा का बेहतरीन चित्रण किया है आशा जी

    जवाब देंहटाएं
  7. वाकई ! अपराधबोध से ग्रस्त व्यक्ति कभी-कभी ऐसी ही मन:स्थिति से गुजरता है और हताशा के गर्त में गिरता चला जाता है ! सशक्त अभिव्यक्ति ! बहुत सुन्दर !

    जवाब देंहटाएं
  8. कुछ पल जिंदगी के ..यूँ ही अकेले से

    जवाब देंहटाएं
  9. आपकी यह बेहतरीन रचना शनिवार 29/09/2012 को http://nayi-purani-halchal.blogspot.in पर लिंक की जाएगी. कृपया अवलोकन करे एवं आपके सुझावों को अंकित करें, लिंक में आपका स्वागत है . धन्यवाद!

    जवाब देंहटाएं
  10. ऐसी ही मनोदशा में लोग अपराधी प्रवृति की ओर अग्रसर हो जाते हैं ... यथार्थ को कहती रचना

    जवाब देंहटाएं

Your reply here: