03 जनवरी, 2013

आदित्य की प्रथम किरण

आदित्य की प्रथम किरण सा
कितना  सुखद  सानिध्य
और तुम्हारा स्नेहिल स्पर्श 
कर जाता अभिमंत्रित
 मन मयूर को\
व्योम में  सूर्य बिम्ब से
अरुणिम अधर 
प्रमुदित करते 
मधुर मुस्कान से
 फूल झरते 
अदभुद भाव लिए मुख पर 
कर जाती बिभोर 
टीस  सी होने लगती जब 
कोई छूना चाहता तुम्हें
चाहत है यही 
भूले से भी न छुए किसी का 
साया भी तुम्हे 
सृष्टि की अनमोल कृति हो
ऐसी ही रहो |
आशा

13 टिप्‍पणियां:

  1. मधुर मुस्कान से
    फूल झरते
    ---------------
    sundar rachna

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  2. बहुत बढ़िया आंटी
    नव वर्ष की हार्दिक शुभकामनाएँ।

    सादर

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  3. बहुत सुन्दर व् सार्थक प्रस्तुति . हार्दिक आभार हम हिंदी चिट्ठाकार हैं

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  4. मधुर भाव,सुन्दर अभिव्यक्ति ;
    नई पोस्ट : काश ! हम सभ्य न होते

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  5. बहुत सुन्दर....

    नववर्ष मंगलमय हो..
    सादर
    अनु

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  6. फूल झरते
    अदभुद भाव लिए मुख पर ............अद्भुत अद्भुत।।।।।अद्-भुत ....
    कर जाती बिभोर
    टीस सी होने लगती जब
    कोई छूना चाहता तुम्हें
    चाहत है यही
    भूले से भी न छुए किसी का
    साया भी तुम्हे
    सृष्टि की अनमोल कृति हो
    ऐसी ही रहो |
    आशा

    बहुत सुन्दर भाव और विचार की अभिव्यक्ति हुई है रचना में .

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  7. बहुत बढ़िया.सुन्दर रचना..आप को
    नव वर्ष की हार्दिक शुभकामनाएँ।

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  8. इस वक्त वक्त मुद्दा है उस कथित ना -बालिग़ का जिसकी दरिंदगी ने बर्बरता को भी मात किया .इसे क़ानून की आड़ में ओट लेकर भागने न दिया जाए .ये कैसा ना -बालिग़ है ? शुक्रिया आपकी सद्य

    टिपण्णी .

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  9. आकर्षक चित्र के साथ मनमोहिनी रचना ! बहुत सुन्दर !

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  10. ♥(¯`'•.¸(¯`•*♥♥*•¯)¸.•'´¯)♥
    ♥♥नव वर्ष मंगलमय हो !♥♥
    ♥(_¸.•'´(_•*♥♥*•_)`'• .¸_)♥



    आदित्य की प्रथम किरण सा
    कितना सुखद सानिध्य और तुम्हारा स्नेहिल स्पर्श
    कर जाता अभिमंत्रित मन मयूर को

    बहुत सुंदर !
    आदरणीया आशा जी


    आभार !
    श्रेष्ठ सृजन की आकांक्षा सहित …
    हार्दिक शुभकामनाएं …
    राजेन्द्र स्वर्णकार
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