14 जनवरी, 2014

सर्द हवाएं



सर्द हवाएं
है धवल चादर
ठिठुरी वादी |

दीदार तेरा
हरता मन मेरा
दीवाना हुआ |

ए मेरी सखी
तू सब भूल गयी
हुई बेगानी |

खिला कमल
झाँक रहा जल में
हो कर मुग्ध |

सुख क्षणिक
आभास नहीं होता
दुखी संसार |

दुःख बसा है
रग रग में तेरे
कैसे सुखी हो |

छटा कोहरा
नन्हीं बूँदें जल की
झरने लगीं |

कुसुम पर
एक बूँद ओस की
रही थिरक  |
आशा

13 टिप्‍पणियां:

  1. कुसुम पर
    एक बूँद ओस की
    रही थिरक |
    bahut khub..............great!!!

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  2. सुन्दर चित्र और कमाल के हाइकू ... पूरक इक दूजे के ...

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  3. आपकी लिखी रचना बुधवार 15/01/2014 को लिंक की जाएगी...............
    http://nayi-purani-halchal.blogspot.in
    आप भी आइएगा ....धन्यवाद!

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  4. बहुत सुंदर चित्र और हायकू.
    मकर संक्रांति की शुभकामनाएं !!

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  5. बहुत ही सुंदर हाईकू एवँ हर हाईकू को और प्रभावशाली बनाते पूरक चित्र ! आनंद आ गया !

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  6. इस टिप्पणी को लेखक द्वारा हटा दिया गया है.

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  7. सटीक प्रस्तुति-
    आभार आदरणीया--

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  8. बहुत सुन्दर हायकू....
    सुन्दर प्रस्तुति भी..

    सादर
    अनु

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  9. सर्दी के इस मौसम के सुंदर फोटोग्राफ्स और अपनी खूबसूरत पंक्तियों के ज़रिये आपने तो जीवन का फलसफां ही समझा दिया साथ ही संसार की क्षणभंगुरता का भी ज्ञान करा दिया...बेहतरीन रचना।।।

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  10. हाइकू के भाव से मेल खाती चित्र बहुत प्रभावी है !
    मकर संक्रान्ति की शुभकामनाएं !
    नई पोस्ट हम तुम.....,पानी का बूंद !
    नई पोस्ट बोलती तस्वीरें !

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