10 जनवरी, 2014

जलता दिया

(१)
जलता दिया 
तम तभी हरता 
जब स्नेह हो |
(२)
रीतते रिश्ते 
मन दुखी करते
नैन हें  नम |
(३)
जश्न ही मना
प्रातः से संजा तक 
ना कर काम |
(४)
फंसा जाल में
धूमिल होती आशा
शेष निराशा |
(५)
जीवन धन
नाम निराशा नहीं
आशा ही आशा |
(६)
सुख क्षणिक
आभास नहीं होता
दुखी संसार |
(7)
दुःख बसा है
रग रग में तेरे
कैसे सुखी हो |
(8)
सूनी गलियाँ
रंग रसिया बिन
होली कैसे हो |
(9)

होली में रंगी
भीगी लट उलझे
रंग छूटे ना |
आशा









23 टिप्‍पणियां:

  1. बहुत सुन्दर प्रस्तुति...!
    आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा कल शनिवार (11-1-2014) "ठीक नहीं" : चर्चा मंच : चर्चा अंक : 1489" पर होगी.
    सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है.
    सादर...!

    जवाब देंहटाएं
  2. वाह सभी हायकू..बहुत सुन्दर बने हैं...

    जवाब देंहटाएं
  3. बढ़िया प्रस्तुति आदरेया-
    आभार-

    जवाब देंहटाएं
  4. इस टिप्पणी को एक ब्लॉग व्यवस्थापक द्वारा हटा दिया गया है.

    जवाब देंहटाएं
  5. आपकी इस प्रस्तुति को कल की बुलेटिन विश्व हिन्दी दिवस और ब्लॉग बुलेटिन में शामिल किया गया है। कृपया एक बार आकर हमारा मान ज़रूर बढ़ाएं,,, सादर .... आभार।।

    जवाब देंहटाएं
  6. बहु रंगी दुनिया पर सुन्दर हाइकु !
    नई पोस्ट आम आदमी !
    नई पोस्ट लघु कथा

    जवाब देंहटाएं
  7. जीवन के रंगों से रंगे सुन्दर और प्रभावी हाइकु...

    जवाब देंहटाएं
  8. सुंदर, सार्थक, सशक्त हाईकू ! पूरक चित्रों के साथ और प्रभावी बन पड़े हैं ! अनन्त शुभकामनायें !

    जवाब देंहटाएं

Your reply here: